
संवाददाता सचिन पाण्डेय
उन्नाव।।भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के क्रम में चलाए जा रहे विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत हसनगंज तहसील क्षेत्र में एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। क्षेत्र के लगभग 54 हजार मतदाताओं का रिकॉर्ड मिलान और भौतिक सत्यापन अब तक अधूरा है। इस प्रशासनिक गतिरोध को दूर करने और मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाने के लिए तहसील प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए हजारों मतदाताओं को नोटिस जारी कर सुनवाई शुरू कर दी है।
मायका पक्ष का रिकॉर्ड और महानगरों का प्रवास बना बाधा
सत्यापन प्रक्रिया में आ रही रुकावट के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण सामने आए हैं। पहला कारण विवाहित महिलाओं द्वारा अपने मायके पक्ष की वर्ष 2003 की मतदाता सूची का विवरण प्रस्तुत न कर पाना है। नियमानुसार, सत्यापन के लिए पुराने चुनावी रिकॉर्ड की आवश्यकता होती है, जिसे उपलब्ध कराने में अधिकांश परिवार असमर्थ दिख रहे हैं।
दूसरा प्रमुख कारण पलायन है। हसनगंज क्षेत्र के बड़ी संख्या में मतदाता रोजगार की तलाश में दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़ और लुधियाना जैसे महानगरों में रह रहे हैं। निर्वाचन अधिकारी जब सत्यापन के लिए उनके पते पर पहुंच रहे हैं, तो वहां ताले लटके मिल रहे हैं या केवल बुजुर्ग परिजन ही उपलब्ध हैं। दस्तावेजों की अनुपलब्धता के कारण इन मतदाताओं की पात्रता संदिग्ध श्रेणी में बनी हुई है।
तहसीलदार न्यायालय में रोजाना हो रही सुनवाई
सत्यापन की इस चुनौती से निपटने के लिए तहसीलदार अविनाश चौधरी ने न्यायालय लगाकर सुनवाई की प्रक्रिया तेज कर दी है। प्रशासन द्वारा प्रतिदिन लगभग 150 मतदाताओं या उनके प्रतिनिधियों को साक्ष्यों के साथ तलब किया जा रहा है। हालिया सुनवाई के दौरान तहसीलदार ने 43 मतदाताओं के परिजनों के बयान दर्ज किए और उन्हें आवश्यक दस्तावेज जमा करने के निर्देश दिए।
सुनवाई की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उपस्थित मतदाताओं की फोटो और उनसे संबंधित रिपोर्ट को तत्काल निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड किया जा रहा है। तहसीलदार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश नहीं है।
विवाहित महिलाओं के लिए ‘हाईस्कूल सर्टिफिकेट’ का विकल्प
प्रशासनिक सख्ती के बीच मानवीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए तहसीलदार अविनाश चौधरी ने विवाहित महिलाओं को एक बड़ी राहत दी है। जिन महिलाओं के पास अपने मायके पक्ष की वर्ष 2003 की मतदाता सूची का विवरण, बूथ संख्या या माता-पिता का क्रमांक उपलब्ध नहीं है, वे विकल्प के तौर पर अपने हाईस्कूल का शैक्षिक प्रमाण पत्र (अंकतालिका या सनद) प्रस्तुत कर सकती हैं।
प्रशासन का मानना है कि इस वैकल्पिक व्यवस्था से उन शिक्षित महिलाओं को मदद मिलेगी जिनके पास पुराने दस्तावेजी प्रमाण नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर न तो मतदाता सूची का विवरण और न ही शैक्षिक प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया गया, तो संबंधित नाम को मतदाता सूची से विलोपित (हटाने) करने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।



