
फतेहपुर।। जिले में सिंचाई व्यवस्था को लेकर एक बड़ा खेल सामने आया है, जिसने न केवल सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि किसानों की उम्मीदों को भी गहरी चोट पहुंचाई है। सूत्रों और क्षेत्रीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, नहरों की सफाई के नाम पर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार किया गया है।बताया जा रहा है कि जिले की कई रजबहा और माइनरों में केवल सड़क किनारे कुछ दूरी तक औपचारिक सफाई दिखाकर पूरी नहर की सफाई का बजट निकाल लिया गया।
यानी काम नाम मात्र और भुगतान पूरा — यह सीधा-सीधा सरकारी धन की बंदरबांट का मामला नजर आता है।
रावतपुर रजबहा” और भगवन्तपुर माइनर” में खेल उजागर सूत्रों के मुताबिक, करीब 14 किलोमीटर लंबी रावतपुर रजबहा में 0 से 9 किलोमीटर तक काम कुछ जनप्रतिनिधियों से जुड़े ठेकेदारों से करवाया गया, लेकिन शेष लगभग 5 किलोमीटर का काम एक चहेती कंस्ट्रक्शन कंपनी को देकर बिना काम कराए ही पूरा भुगतान निकाल लिया गया।
इतना ही नहीं, संबंधित जेई को निर्देशित कर एमबी (मेजरमेंट बुक) भरवाई गई और फर्जी तरीके से भुगतान पास करा दिया गया। यही खेल भगवन्तपुर माइनर में भी दोहराया गया। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि कई अन्य नहरों में भी बिना कार्य कराए सीधे भुगतान निकाल लिया गया है।
किसान परेशान, सिस्टम मस्त सरकार हर साल किसानों को समय पर पानी उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती है, ताकि खेतों तक पानी पहुंचे और उत्पादन प्रभावित न हो। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
किसानों का कहना है कि नहरों में पानी नहीं पहुंच रहा, सफाई अधूरी है, और जब शिकायत की जाती है तो जिम्मेदार अधिकारी टालमटोल करते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार की योजनाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी?
सिस्टम” के नाम पर दबाव और इनाम_सूत्र बताते हैं कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड सिंचाई खंड का एक जिम्मेदार अधिकारी है, जो अपने “सिस्टम” के तहत काम करता है। जो कर्मचारी इस सिस्टम का हिस्सा नहीं बनते, उन्हें परेशान किया जाता है, जबकि साथ देने वालों को सरकारी बजट का हिस्सा “इनाम” के रूप में दिया जाता है। कार्यालय में बैठे बाबू और कुछ कंस्ट्रक्शन कंपनियों की मिलीभगत से सरकारी धन को निजी फर्मों में ट्रांसफर कर जेबें भरी जा रही हैं। जनप्रतिनिधियों के दावे भी कटघरे में जनप्रतिनिधि अक्सर विकास और किसानों के हित की बात करते हैं, लेकिन इस मामले में उनकी भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आखिर कैसे उनके क्षेत्र में इस तरह का खुला खेल चलता रहा और उन्हें भनक तक नहीं लगी? या फिर सब कुछ जानकारी में होते हुए भी चुप्पी साधी गई?
जिलाधिकारी से बड़ी उम्मीद —क्या होगी कार्रवाई, अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस पूरे मामले का संज्ञान लिया जाएगा? क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी?या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। जिले के जागरूक नागरिकों और किसानों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और सरकारी धन की वसूली की जाए।
यह मामला सिर्फ भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि किसानों के हक और विश्वास से जुड़ा हुआ है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह न केवल सिस्टम की साख को गिराएगा बल्कि किसानों को और ज्यादा संकट में डाल देगा।अब देखना यह है कि प्रशासन इस खबर को गंभीरता से लेकर सख्त कदम उठाता है या फिर यह “खेल” यूं ही चलता रहेगा।



