
फतेहपुर। जनपद में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने और अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए हाल ही में , पुलिस अधीक्षक द्वारा सख्त निर्देश जारी किए गए थे। प्रेस वार्ता में साफ संदेश था नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई होगी, लेकिन किसी भी तरह की अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों को चुनौती देती नजर आ रही है। शहर के प्रमुख चौराहों पर जो हो रहा है, वह कानून लागू करने की कार्रवाई है या फिर ‘मैदान स्तर पर बना अनौपचारिक सिस्टम’यह अब बड़ा सवाल बन चुका है।राधानगर बना ‘हॉटस्पॉट’: दो दिन में बदली तस्वीरसूत्रों के अनुसार, राधानगर क्षेत्र में ट्रैफिक ड्यूटी पर तैनात एक दरोगा के आने के बाद से अचानक कार्रवाई तेज हुई है।लेकिन आरोप यह हैं कि:कार्रवाई का फोकस नियम पालन से ज्यादा वसूली पर हैखास तौर पर कमजोर और गरीब वाहन चालकों को टारगेट किया जा रहा हैमौके पर ही ‘सेटिंग’ के जरिए मामला निपटाने का दबाव बनाया जाता हैक्या यह कानून का पालन है या मौके पर फैसला करने वाला समानांतर सिस्टम₹1500 प्रति गाड़ी रोजाना टारगेट कलेक्शन’ के आरोपसूत्रों का दावा है कि:गाड़ियों को रोककर मामूली खामियां निकाली जाती हैंचालान की धमकी देकर दबाव बनाया जाता हैप्रति वाहन ₹1000–₹1500 तक की कथित वसूलीऔर सबसे गंभीर आरोप सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रतिदिन ₹4000 ₹5000 तक की कमाईका लक्ष्य तय है।लोकेशन फिक्स जहां‘एक्शन’ सबसे ज्यादासूत्रों और स्थानीय लोगों के मुताबिक जिन जगहों पर सबसे ज्यादा गतिविधि देखी जा रही है:राधानगर चौराहाज्वालागंज क्षेत्रलखनऊ बाईपासतय प्वाइंट्स पर ही वाहनों को रोका जाता हैपास की दुकानों में बैठकर नेटवर्क संचालित होता हैबीच में सेटिंग कराने वाले” लोग सक्रिय रहते हैंवीडियो कोई नहीं बना सकता” कथित बयान ने बढ़ाई चिंतासूत्रों के अनुसार संबंधित दरोगा द्वारा कथित तौर पर कहा गया:हम पर कोई वीडियो नहीं बना सकता, हम पूरी निगरानी रखते हैं।
अगर यह सच है, तो यह बयान सिर्फ आत्मविश्वास नहीं,बल्कि सिस्टम में जवाबदेही की कमी की ओर इशारा करता है।दौड़ाकर पकड़न मौके पर निपटारागरीब सबसे ज्यादा प्रभावित पीड़ितोंमोटरसाइकिल सवारों को खास तौर पर रोका जाता हैकई बार दौड़ाकर पकड़ने की स्थितिडर और दबाव में मौके पर ही पैसे देकर छुटकाराकानून का पालन नहीं, बल्कि डर आधारित वसूली का माहौल।गार्ड और सहयोगियों की भूमिका पर भी सवालआरोप यह भी हैं किमौके पर मौजूद कर्मचारी चालान से पहले ही रास्ता सुझाते हैं चालान कटेगा या सेटिंग होगी”यह मौके पर तय होता हैइससे पूरी टीम कीकार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं



