
सड़क छाप सुल्तान, बेबस कप्तान,
संवाददाता इरफान कुरैशी,
लखनऊ। राजधानी के आशियाना क्षेत्र में इन दिनों प्रशासन के आदेशों और नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिस साप्ताहिक मंगल बाजार को अधिकारियों ने बारा-बिरवा से हटाकर बंगला बाजार चौराहे से डॉ. राम मनोहर लोहिया परिकल्प भवन के पास पूरे कायदे-कानून के साथ शिफ्ट किया था, अब वहां कानून नहीं, बल्कि लठैतों और कब्जाधारियों का सिक्का चल रहा है।
हैरानी की बात यह है कि जिस जगह का निरीक्षण खुद वरिष्ठ अधिकारियों ने किया और जिसे साप्ताहिक दुकानदारों के लिए आवंटित किया गया, वहां अब अराजक तत्व अपना मालिकाना हक जता रहे हैं। बाजार समिति के अध्यक्ष नदीम सिद्दीकी, जो इस पूरी व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उनके सामने ये स्वयंभू कब्जाधारी एक बड़ी चुनौती बनकर खड़े हो गए हैं।
समिति अध्यक्ष नदीम सिद्दीकी ने व्यथित होकर कहा हमें प्रशासन ने जगह दी, अधिकारियों ने मुहर लगाई, लेकिन अब कुछ स्थानीय रसूखदार और अराजक तत्व व्यापारियों के साथ गुंडागर्दी पर उतारू हैं। वे खुद को विभाग का मालिक बताकर जबरन दुकानें लगाने की धमकी दे रहे हैं। ये व्यापारी नहीं, बल्कि बाजार की शांति भंग करने वाले अराजक तत्व हैं।
बाजार में अभी दुकानदार पूरी तरह अपनी बिसात बिछा भी नहीं पाए थे कि इन तथाकथित स्थानीय दावेदारों ने अपनी गुंडागर्दी का शोरूम खोल दिया है। आरोप है कि ये लोग व्यापारियों को डरा-धमका रहे हैं और काम में अड़चनें पैदा कर रहे हैं। इनके हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब बाजार में किसी भी समय घटना की आशंका बनी हुई है। वक्त रहते अगर इन अराजक तत्वों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो स्थिति हाथ से निकल सकती है।
नदीम सिद्दीकी की बातों में सच्चाई और दर्द दोनों है। एक तरफ वे प्रशासन के आदेश का पालन करवाना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ इन अराजक तत्वों के पीछे कुछ भितरघाती अधिकारियों और स्थानीय रसूखदारों का हाथ होने की बू आ रही है।
बड़ा सवाल यह है कि जब अधिकारियों ने खुद जगह तय की, तो फिर ये सड़क छाप सुल्तान कहां से पैदा हो गए? क्या लखनऊ का प्रशासन इतना लाचार हो गया है कि चंद गुंडे सरकारी आदेशों को अंगूठा दिखा रहे हैं? दुकानदार डरे हुए हैं, व्यापार सहमा हुआ है और कब्जाधारी सीना तानकर घूम रहे हैं।
बाजार समिति के अध्यक्ष ने साफ कर दिया है कि वे इन अराजक भेड़ियों के आगे झुकने वाले नहीं हैं। लेकिन यदि प्रशासन ने तुरंत नकेल नहीं कसी, तो आशियाना का यह साप्ताहिक बाजार व्यापार का केंद्र नहीं, बल्कि रक्तपात और आगजनी का अखाड़ा बनकर रह जाएगा।



