
फतेहपुर।।खागा मंडी के अंदर चल समिति इन दिनों गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में है। सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार मंडी में टेंडर प्रक्रिया के नाम पर कथित रूप से अवैध वसूली का खेल लंबे समय से चल रहा है। आरोप है कि यह वसूली सीधे तौर पर न होकर गार्ड और अन्य माध्यमों के जरिए कराई जाती है, जिससे पूरे मामले पर पर्दा डाला जा सके।स्थानीय व्यापारियों और संबंधित लोगों का कहना है कि मंडी में काम कराने, टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने या अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए अनौपचारिक भुगतान की मांग की जाती है। यहां तक कि चेक बनाने जैसे सामान्य कार्यों के लिए भी बाबू स्तर पर पैसे लिए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इससे छोटे व्यापारियों और किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।जब इस मामले में मंडी सचिव से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि इस तरह का कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं है और मंडी में सभी कार्य नियमों के अनुसार ही किए जा रहे हैं। हालांकि, स्थानीय स्तर पर मिल रही लगातार शिकायतें प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही हैं।सूत्रों का यह भी कहना है कि यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़े स्तर पर अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं। मंडी में टेंडर के नाम पर धन उगाही और कर्मचारियों द्वारा कथित वसूली की बात सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।गौरतलब है कि मंडी समितियां किसानों और व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए बनाई गई हैं, लेकिन यदि उन्हीं संस्थानों में भ्रष्टाचार पनपने लगे तो इसका सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था और भरोसे पर पड़ता है। ऐसे में जरूरत है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुएपारदर्शी जांच कराए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह मामला न केवल मंडी प्रशासन बल्कि जिले के उच्च अधिकारियों के लिए भी बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

