
कानपुर। चकेरी थाना क्षेत्र में एक साधारण लूट के रूप में शुरू हुई घटना ने उस समय सनसनीखेज मोड़ ले लिया, जब पुलिस की जांच में ₹1600 करोड़ के संदिग्ध कैश नेटवर्क का खुलासा हुआ। पुलिस मुठभेड़ के बाद 6 अभियुक्तों की गिरफ्तारी और ₹10.73 लाख की बरामदगी ने एक ऐसे वित्तीय साम्राज्य की परतें खोल दी हैं, जिसने अब देश की बड़ी आर्थिक और सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।मामले की शुरुआत तब हुई जब वादी ने ₹25 लाख की लूट की सूचना तो दी, लेकिन वह रिपोर्ट दर्ज कराने से लगातार कतराता रहा।
वादी के इस संदिग्ध व्यवहार ने पुलिस को सतर्क कर दिया। जब बैंक ट्रांजैक्शन की गहनता से पड़ताल की गई, तो सामने आया कि उसी दिन संबंधित खाते से ₹3.20 करोड़ की भारी-भरकम नकद निकासी हुई थी। जांच में स्पष्ट हुआ कि इस रकम का अधिकांश हिस्सा पहले ही बांट दिया गया था और जो ₹25 लाख कैरियर के जरिए ले जाए जा रहे थे, उन्हें लुटेरों ने अपना निशाना बनाया।पुलिस मुठभेड़ के बाद पकड़े गए 6 आरोपियों में से दो शातिर अपराधी पिछले साल अक्टूबर से ही इस लूट की रेकी कर रहे थे। उन्होंने कई बार रिहर्सल की और एक बार असफल रहने के बाद इस वारदात को अंजाम दिया।

पकड़े गए अभियुक्तों की तकनीकी लोकेशन और गतिविधियों का विश्लेषण करने पर उनके तार दिल्ली के जामा मस्जिद क्षेत्र सहित कश्मीर और नेपाल तक फैले पाए गए हैं, जो इनके नेटवर्क की अंतरराष्ट्रीय पहुंच की ओर इशारा करते हैं।इस पूरे प्रकरण का मास्टरमाइंड ‘महफूज’ नाम का व्यक्ति बताया जा रहा है। जांच में उसके 14 बैंक खातों का पता चला है। चौंकाने वाली बात यह है कि केवल आईडीबीआई बैंक के माध्यम से पिछले सवा दो वर्षों में लगभग ₹850 करोड़ का कैश रोल किया गया। कुल मिलाकर 12 अलग-अलग बैंकों के 68 खातों से ₹1600 करोड़ की नकद निकासी की बात सामने आई है। नकद जमा करने का मुख्य केंद्र फतेहपुर, उन्नाव और कानपुर क्षेत्र रहा है।इतनी विशाल राशि का नकद लेनदेन सामान्य व्यावसायिक गतिविधि से परे है, जिसके कारण अब इस मामले की जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग, जीएसटी और सीबीआई को दी जा रही है। पुलिस को संदेह है कि यह एक संगठित हवाला नेटवर्क, बड़े पैमाने पर कर चोरी या शेल कंपनियों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का मामला हो सकता है। सबसे गंभीर बिंदु राष्ट्रविरोधी गतिविधियों और आतंकी फंडिंग की संभावना है, क्योंकि नेटवर्क के तार संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़े मिले हैं।फिलहाल पुलिस यह भी जांच रही है कि इतनी बड़ी नकदी के प्रवाह पर बैंकों ने समय रहते संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट (STR) क्यों नहीं दी।
इस नेटवर्क की संरचना इतनी जटिल है कि इसमें मुख्य संचालक और फील्ड ऑपरेटिव के बीच कई परतें थीं। इस ऐतिहासिक खुलासे को देखते हुए पुलिस आयुक्त ने टीम को ₹1 लाख के पुरस्कार से सम्मानित किया है। जैसे-जैसे केंद्रीय एजेंसियां इस जांच में शामिल होंगी, यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर बड़े खुलासे का कारण बन सकता है।



