
उन्नाव।धर्मपाल सिंह के एक बयान ने जनपद की सियासत में उबाल ला दिया है। प्रदेश सरकार में पशुधन मंत्री व उन्नाव के प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह ने किसानों की बर्बाद हो रही फसलों को लेकर ऐसा बयान दे दिया, जिससे किसान संगठनों और विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का मौका मिल गया।मंत्री मंगलवार को उन्नाव पहुंचे,विकास भवन सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री ने विकास कार्यों और कानून व्यवस्था की समीक्षा की तथा खामियां मिलने पर नाराजगी जताते हुए एक सप्ताह में सुधार के निर्देश दिए।
मंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर गौवंश संरक्षण को लेकर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में “गाय दिखाई नहीं देती थी, क्योंकि कसाई काटते थे”, जबकि मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में “गाय को देखकर कसाई कांपता है”।लेकिन सबसे ज्यादा विवाद उस वक्त खड़ा हो गया जब मंत्री से सवाल किया गया कि आवारा गौवंश के कारण किसान परेशान हैं और फसलें बर्बाद हो रही हैं। इस पर मंत्री ने कहा – “किसानों की बर्बाद हो रही फसलों का जिम्मेदार किसान खुद है, इसमें किसान दोषी है।”मंत्री के इस बयान के बाद किसान संगठनों में नाराजगी है।
किसानों का कहना है कि जब आवारा पशु रातों-रात खेत साफ कर दे रहे हैं, तब जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की बनती है, न कि किसान की।विपक्षी दलों ने भी मंत्री के बयान को “किसान विरोधी मानसिकता” करार देते हुए कहा कि एक ओर सरकार किसान हितैषी होने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर मंत्री खुले मंच से किसानों को ही दोषी ठहरा रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिस प्रदेश में खेती बड़ी आबादी का मुख्य सहारा है, वहां इस तरह का बयान सरकार के लिए भारी पड़ सकता है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस बयान से दूरी बनाता है या मंत्री अपने बयान पर स्पष्टीकरण देते हैं। फिलहाल, उन्नाव से उठी यह चिंगारी प्रदेश की सियासत में बड़ा मुद्दा बनती दिख रही है।

