
संवाददाता सचिन पाण्डेय
उन्नाव। जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। इसी कड़ी में शनिवार रात प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ. हरिनंदन प्रसाद ने पुरवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का औचक निरीक्षण किया। देर रात अचानक हुए इस निरीक्षण से अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में पसरी गंदगी और चिकित्सा सुविधाओं में लापरवाही देखकर प्रभारी सीएमओ का पारा चढ़ गया और उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों की जमकर क्लास लगाई।
रात के सन्नाटे में औचक धावा
प्रभारी सीएमओ डॉ. हरिनंदन प्रसाद शनिवार रात बिना किसी पूर्व सूचना के पुरवा सीएचसी पहुंचे। उनका उद्देश्य रात के समय मरीजों को मिलने वाली आपातकालीन सेवाओं और अस्पताल की वास्तविक स्थिति की पड़ताल करना था। जैसे ही वे अस्पताल परिसर में दाखिल हुए, चारों ओर फैली अव्यवस्थाएं उजागर होने लगीं। वार्डों से लेकर गैलरी तक में सफाई का अभाव दिखा, जिसे देख उन्होंने तत्काल संबंधित पटल सहायकों और सफाई कर्मियों को तलब किया।
गंदगी देख जताई कड़ी नाराजगी
निरीक्षण के दौरान सबसे बुरा हाल अस्पताल के टॉयलेट्स और वार्डों के कोनों का मिला। प्रभारी सीएमओ ने पाया कि डस्टबिन समय पर खाली नहीं किए गए थे और बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण में भी लापरवाही बरती जा रही थी। उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि एक स्वास्थ्य केंद्र जहाँ लोगों को संक्रमण से मुक्त होना चाहिए, वहां खुद गंदगी संक्रमण को दावत दे रही है। उन्होंने मौके पर मौजूद वार्ड बॉय और सफाई पर्यवेक्षक को कड़ी चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई, तो वेतन रोकने जैसी कार्रवाई की जाएगी।
इमरजेंसी वार्ड और दवाओं का स्टॉक खंगाला
सफाई के बाद प्रभारी सीएमओ ने इमरजेंसी वार्ड का रुख किया। वहां उन्होंने भर्ती मरीजों से बातचीत की और मिल रहे इलाज के बारे में फीडबैक लिया। उन्होंने ड्यूटी रजिस्टर चेक किया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ अपनी शिफ्ट में मौजूद हैं या नहीं। दवाओं के स्टॉक की जांच करते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि अस्पताल में आने वाले किसी भी मरीज को बाहर की दवा न लिखी जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सभी दवाएं मरीजों को अस्पताल से ही मिलनी चाहिए।
स्वास्थ्य कर्मियों को सख्त निर्देश
डॉ. हरिनंदन प्रसाद ने अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया कि मरीजों और उनके तीमारदारों के साथ व्यवहार में संवेदनशीलता बरतें। उन्होंने कहा कि रात के समय दुर्घटना या इमरजेंसी की स्थिति में आने वाले मरीजों को तत्काल उपचार मिलना चाहिए, इसमें किसी भी तरह की कागजी देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सीएचसी प्रभारी को आदेश दिया कि वे स्वयं नियमित रूप से वार्डों का चक्कर लगाएं और यह सुनिश्चित करें कि बेड पर बिछी चादरें रोज बदली जा रही हैं।



