
जिला संवाददाता देवेंद्र तिवारी
उन्नाव। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का दावा करती है, लेकिन उन्नाव के सिंचाई विभाग में बैठे जिम्मेदार और ठेकेदार इस मंशा को ठेंगा दिखा रहे हैं। जनपद के न्योतनी-हसनगंज क्षेत्र में नहर सफाई के नाम पर सरकारी बजट के बंदरबांट का एक बड़ा मामला सामने आया है। हाईटेक ड्रोन सर्वे और लाखों के बजट के बावजूद धरातल पर नहरों की स्थिति बदतर है, जिससे किसानों की फसलें सिंचाई के अभाव में दम तोड़ रही हैं।
ड्रोन से हुआ सर्वे, फिर भी ‘टेल’ तक नहीं पहुँचा पानी
सिंचाई विभाग ने इस बार दावा किया था कि नहरों की सफाई में पारदर्शिता लाने के लिए ड्रोन से निगरानी की गई है। न्योतनी रजबहा, जिसकी कुल लंबाई लगभग 20 किलोमीटर है, की सफाई का कार्य दिसंबर माह में कागजों पर पूर्ण दिखाया गया। विभाग का दावा था कि 22 दिसंबर को नहर में पानी छोड़ दिया गया और वह अपनी अंतिम छोर (टेल) तक पहुँच रहा है। लेकिन ‘ट्रुथ इंडिया टाइम्स’ की पड़ताल में विभागीय दावों की कलई खुल गई।
सच्चाई यह है कि सफाई कार्य मानकविहीन होने के कारण पानी ‘टेल’ तक तो दूर, बीच रास्ते में ही दम तोड़ रहा है। समदपुर गांव के पास रजबहा की ‘खांदी’ (कटाव) पिछले एक सप्ताह से कटी पड़ी है। विडंबना देखिए कि एक तरफ किसान पानी के लिए तरस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कीमती पानी अशूरन खेड़ा गांव के नाले से होते हुए सीधे सई नदी में बेकार बह रहा है।
आधा दर्जन से अधिक गांवों में सिंचाई संकट
नहर कटने और समुचित सफाई न होने के कारण समदपुर, अशूरन खेड़ा, जसमड़ा बब्बन, इस्माइलाबाद, फिरोजपुर, गिरवरखेड़ा और गनेशखेड़ा समेत दर्जनों गांवों के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। नहर की क्षमता करीब 60 क्यूसेक पानी की है, लेकिन वर्तमान में आधा पानी भी नहीं आ पा रहा है। इस अव्यवस्था का सबसे बुरा असर चंदेशवा माइनर पर पड़ा है, जो आज भी पूरी तरह सूखी है। किसानों को मजबूरन निजी नलकूपों से सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे उनकी खेती की लागत दोगुनी हो गई है।



