
संवाददाता सचिन पाण्डेय
उन्नाव। ऋतुराज बसंत के आगमन का प्रतीक ‘बसंत पंचमी’ का पर्व जनपद उन्नाव में पूरी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। शुक्रवार को सुबह से ही जिले के प्रमुख मंदिरों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की आराधना का स्वर गूंजने लगा। ज्ञान, कला और बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां शारदे के पूजन के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। पीले वस्त्रों में सजे भक्तों और केसरिया फूलों से महकते मंदिर परिसरों ने पूरे जनपद को भक्तिमय रंग में सराबोर कर दिया।
शहर के प्रमुख मंदिरों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक, हर ओर बसंत की बयार बहती नजर आई। मंदिरों में मां सरस्वती की प्रतिमाओं का विशेष श्रृंगार किया गया था। मां को पीली चुनरी, पीले पुष्प और केसरिया चंदन अर्पित कर भक्तों ने शीश नवाया। भोर की पहली किरण के साथ ही मंदिरों में “या कुन्देन्दु तुषारहार धवला…” और “सरस्वती नमस्तुभ्यं…” जैसे पावन मंत्रों का उच्चारण शुरू हो गया, जिससे वातावरण में एक अद्भुत सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ।
श्रद्धालुओं ने न केवल मंदिरों में दर्शन किए, बल्कि घरों में भी विधि-विधान से कलश स्थापित कर मां वीणावादिनी की पूजा की। बसंत ऋतु के स्वागत में लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर और पीले पकवान बांटकर पर्व की बधाई दी।
विद्यारंभ संस्कार: नन्हे हाथों ने पकड़ी पहली बार कलम
बसंत पंचमी का दिन शिक्षा जगत और विद्यार्थियों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस शुभ अवसर पर जिले के विभिन्न मंदिरों और आश्रमों में ‘विद्यारंभ संस्कार’ का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में अभिभावक अपने छोटे बच्चों को लेकर मंदिर पहुंचे, जहां पुरोहितों ने शुभ मुहूर्त में बच्चों को पहली बार स्लेट और पेंसिल पकड़वाकर अक्षर ज्ञान की शुरुआत कराई।
मान्यता है कि आज के दिन शिक्षा की शुरुआत करने से मां सरस्वती की असीम कृपा बनी रहती है। यही कारण रहा कि स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं ने अपनी पुस्तकों और कलम को मां के चरणों में रखकर सफलता का आशीर्वाद मांगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं ने भी माता के दरबार में माथा टेका।
भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर समितियों ने सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए थे। शहर के सिद्धनाथ मंदिर, कल्याणी देवी मंदिर और अन्य प्रमुख स्थलों पर उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल के साथ-साथ स्वयंसेवकों की तैनाती की गई थी। श्रद्धालुओं को कतारबद्ध होकर दर्शन कराने की व्यवस्था की गई ताकि महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखा गया और जगह-जगह पेयजल की व्यवस्था की गई।

