
संवाददाता सचिन पाण्डेय
उन्नाव।।शहीद चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार स्थित डियर पार्क नवाबगंज में इस बार सर्दी ने न सिर्फ इंसानों को, बल्कि पार्क में रहने वाले हिरणों को भी प्रभावित किया है। पार्क में कभी पर्यटकों की आँखों का आकर्षण बनने वाले ये हिरण अब कमजोर और दुर्बल नजर आ रहे हैं। वन विभाग की ओर से सर्दी से बचाव के लिए फूस के छोटे आशियाने बनाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद हिरणों की संख्या में भारी गिरावट आई है। पिछले साल 28 चीतल और 1 पढ़ा प्रजाति सहित कुल 29 हिरण थे, अब ये संख्या घटकर सिर्फ 24 रह गई है।
पार्क में कमजोर होती हिरणों की स्थिति:
डियर पार्क के कर्मचारियों का कहना है कि हिरणों को सूखा भूसा दिया जा रहा है, लेकिन अन्य कोई पोषणकारी आहार जैसे आटा, चोकर या खली नहीं दिया जा रहा है। इसके कारण वे पहले की तुलना में कमजोर हो गए हैं। कर्मचारियों के अनुसार, सर्दी के मौसम में खासतौर पर हिरणों को विटामिन इंजेक्शन देने की व्यवस्था की जाती है, लेकिन वन विभाग के सूत्रों से पता चला है कि आज तक हिरणों का कोई डॉक्टरी चेकअप नहीं हुआ है।
1982 में हुआ था पार्क का निर्माण:
1982 में स्थापित डियर पार्क में शुरुआत में 12 नर और मादा हिरण लाए गए थे। हैरान करने वाली बात यह है कि 40 वर्षों में हिरणों ने महज 17 बच्चों को जन्म दिया है। पिछले एक दशक से हिरणों की संख्या 30 के आंकड़े को पार नहीं कर पाई है। वर्तमान में पार्क में लगभग 16 नर और 9 मादा हिरण हैं।
डियर पार्क में मरे हुए हिरणों के पोस्टमार्टम के लिए 2015 में एक पोस्टमार्टम हाउस का निर्माण किया गया था, लेकिन अब तक इसका उपयोग नहीं किया जा सका है। रेंजर बिजेन्द्र सिंह के अनुसार, यह पोस्टमार्टम हाउस अभी तक विभाग को हैंड ओवर नहीं किया गया है, जिससे इसकी स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।
रेंजर हिमेन्द्र कुरील का कहना है, “हर साल हिरणों के भोजन के लिए बजट आता है और सर्दी में उनका डॉक्टरी चेकअप भी किया जाता है। इंजेक्शन भी दिए जाते हैं। हालांकि, हिरणों की संख्या में गिरावट का कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है।”
इस समय, वन विभाग के कर्मचारियों और पर्यावरण प्रेमियों से यह अपील की जा रही है कि हिरणों के बेहतर संरक्षण और पोषण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में यह प्यारी वन्यजीव प्रजाति फिर से स्वस्थ और खुशहाल हो सके।
आखिरकार, हिरणों की सेहत और संख्या में गिरावट का समाधान कब होगा? यह सवाल अब वन विभाग के लिए एक बड़ा चुनौती बन चुका है।



