
फतेहपुर।जनपद की खागा मंडी समिति एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में है। इस बार मामला और भी ज्यादा चौंकाने वाला है जहां साधारण प्रशासनिक काम, जैसे चेक बनवाना, भी कथित तौर पर रकम दिए बिना” संभव नहीं रह गया है। मंडी सचिव की कार्यशैली और निगरानी पर सीधे सवाल खड़े हो रहे हैं।सूत्रों और स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, मंडी में लंबे समय से सुनियोजित तरीके से वसूली का तंत्र सक्रिय है।
आरोप है कि सीधे तौर पर अधिकारी सामने न आकर गार्ड और बाबू जैसे कर्मचारियों के जरिए पैसा वसूलवाया जाता है, ताकि किसी भी जांच में जिम्मेदारी से बचा जा सके।सबसे गंभीर आरोप चेक जारी करने की प्रक्रिया को लेकर हैं। किसानों और छोटे व्यापारियों का कहना है कि:चेक बनवाने के लिए “पहले सुविधा शुल्क” देना अनिवार्य जैसा बना दिया गया हैबिना भुगतान फाइल आगे नहीं बढ़तीजानबूझकर देरी कर दबाव बनाया जाता है
एक स्थानीय व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि, “अगर पैसा नहीं दो, तो आपका काम हफ्तों लटका रहेगा। मजबूरी में देना पड़ता है।हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद मंडी सचिव ने पूरे मामले से पल्ला झाड़ लिया है। उनका कहना है कि उन्हें ऐसी किसी वसूली की जानकारी नहीं है और सभी काम नियमों के तहत हो रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
लगातार मिल रही शिकायतों ने यह साफ कर दिया है कि मंडी में पारदर्शिता और जवाबदेही की भारी कमी है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यह सब सचिव की जानकारी के बिना संभव है, फिलहाल, खागा मंडी में चेक के बदले चढ़ावा” का यह खेल प्रशासन की साख पर गहरा दाग बनता जा रहा है और सवाल सीधा है: आखिर कब रुकेगा यह वसूली राज?


