
फतेहपुर। जनपद की सदर तहसील इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। तहसील परिसर में कथित तौर पर ऐसा खेल चल रहा है, जो न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि सरकार के “भ्रष्टाचार मुक्त शासन” के दावों को भी कठघरे में खड़ा करता है।सूत्रों के मुताबिक, तहसील में एक रिटायर्ड पेशकार “बुद्धि लाल” अब भी उसी प्रभाव और दबदबे के साथ काम कर रहे हैं, मानो उन्होंने कभी सेवा से विदाई ली ही न हो।
आरोप है कि वह पेशकार की कुर्सी पर बैठकर फाइलों की दिशा तय कर रहे हैं और यह सब बिना किसी आधिकारिक अधिकार के।“रिटायरमेंट सिर्फ कागजों में, हकीकत में जारी है राजस्थानीय लोगों का कहना है कि बुद्धि लाल का रिटायरमेंट केवल औपचारिकता भर है। हकीकत में तहसील के अंदर उनकी पकड़ आज भी पहले जैसी ही मजबूत है।कई कर्मचारियों और दलालों के साथ उनकी सांठगांठ होने की भी चर्चा है, जिसके जरिए “काम कराने” का एक पूरा अनौपचारिक सिस्टम चल रहा है।
बिना ‘सेवा शुल्क’ के नहीं हिलती फाइलेंसूत्र बताते हैं कि तहसील में आम आदमी के लिए काम कराना बेहद मुश्किल हो गया है।नामांतरण होदाखिल-खारिज होआय जाति निवास प्रमाण पत्र होहर काम के लिए रास्ता अलग से बनाना पड़ता है।अगर जेब ढीली की जाए तो फाइलें तेजी से आगे बढ़ती हैं, वरना महीनों तक धूल खाती रहती हैं।अधिकारियों की चुप्पी लापरवाही यामिलीभगत सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले की शिकायतें कई बार विभागीय अधिकारियों तक पहुंचाई जा चुकी हैं।लेकिन आरोप है कि अधिकारी फोन तक नहीं उठातेशिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं होतीजांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती हैऐसे में सवाल उठता हैक्या यह सिर्फ लापरवाही है, या फिर अंदरखाने कोई बड़ी सेटिंग चल रही है ऊपर से नीचे तक सेटिंग जांच हुई तो खुल सकते हैं बड़े राज तहसील के जानकारों का कहना है कि अगर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो सिर्फ एक कर्मचारी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की परतें खुल सकती हैं।यह भी आशंका जताई जा रही है कि यह खेल केवल तहसील स्तर तक सीमित नहीं, बल्कि कुछ बड़े अधिकारियों की जानकारी या संरक्षण में भी चल सकता है।सरकारी दावों पर सवालउत्तर प्रदेश सरकार लगातार जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन” की बात करती है।लेकिन फतेहपुर सदर तहसील की यह स्थिति इन दावों को सीधे चुनौती देती नजर आ रही है।जनता में आक्रोश, कार्रवाई की मांग तेजअब स्थानीय नागरिकों अधिवक्ताओं और सामाजिक संगठनों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर्मचारियों की भूमिका की जांच हो सदद तहसील में पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाएबड़ा सवाल क्याफतेहपुर सदर तहसील में भ्रष्टाचार का यह खेल यूं ही चलता रहेगा या फिर कोई बड़ा अधिकारी इस पर सख्त कार्रवाई कर उदाहरण पेश करेग



