
जिला संवाददाता देवेंद्र तिवारी
उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव सदर कोतवाली क्षेत्र स्थित पीडी नगर में एक बड़ा भू-घोटाला और अवैध कब्जे का मामला गरमाता जा रहा है। शहर के फेफड़े कहे जाने वाले ‘अटल उपवन’ और जन-आस्था के केंद्र ‘बनकी देवी मंदिर’ के पास बेशकीमती सरकारी जमीन को भू-माफियाओं द्वारा खुर्द-बुर्द करने का आरोप लगा है।
स्थानीय सभासदों ने मोर्चा खोलते हुए जिला प्रशासन पर भू-माफियाओं से मिलीभगत का सनसनीखेज आरोप लगाया है और चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो शहर की सड़कों पर बड़ा आंदोलन होगा।
जनभावनाओं और पर्यावरण पर प्रहार
पीडी नगर का यह क्षेत्र न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि धार्मिक रूप से भी संवेदनशील है। क्षेत्रीय सभासद ब्रजेश पांडे सहित कई अन्य जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि जिस भूमि को पर्यावरण संरक्षण और जनता के टहलने के लिए ‘अटल उपवन’ के रूप में विकसित किया गया था, उसे अब निजी लाभ के लिए बेचा जा रहा है। मंदिर के पास हो रही अवैध प्लाटिंग से न केवल श्रद्धालुओं के लिए रास्ता संकरा हो रहा है, बल्कि भविष्य में किसी भी बड़े धार्मिक आयोजन के लिए जगह की कमी पैदा हो जाएगी।
सभासदों ने कहा- ‘प्रशासन की गोद में फल-फूल रहा अवैध कब्जा’
“प्रशासनिक संरक्षण में हो रही है प्लाटिंग”
सभासद ब्रजेश पांडे ने तीखे शब्दों में कहा, “यह कब्जा रातों-रात नहीं हुआ है। प्रशासनिक अधिकारियों की नाक के नीचे सरकारी जमीन पर बाउंड्री वॉल खड़ी की जा रही है और प्लाट काटे जा रहे हैं। जब हम शिकायत करते हैं, तो आश्वासन देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। यह स्पष्ट है कि भू-माफियाओं को सफेदपोशों और कुछ भ्रष्ट अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है।”
सभासदों का दावा है कि शिकायत करने वालों को डराने-धमकाने और उन पर दबाव बनाने का प्रयास भी किया जा रहा है, ताकि अवैध निर्माण का रास्ता साफ रहे।
आस्था के केंद्र ‘बनकी देवी मंदिर’ पर संकट
बनकी देवी मंदिर उन्नाव की आस्था का एक प्रमुख केंद्र है। मंदिर के आसपास की खाली जमीन सार्वजनिक उपयोग के लिए छोड़ी गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इसी रफ्तार से अवैध निर्माण जारी रहा, तो मंदिर के चारों ओर कंक्रीट का जंगल खड़ा हो जाएगा। श्रद्धालुओं ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जिस स्थान पर हरियाली होनी चाहिए थी, वहां ईंटों के ढेर लगे हैं।
भविष्य की समस्याओं की आहट
जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि शहर के खुले स्थानों और हरित क्षेत्रों पर कब्जा होने से भविष्य में गंभीर समस्याएं पैदा होंगी:
जलभराव: प्राकृतिक ड्रेनेज सिस्टम और कच्चे तालाबों को पाटकर प्लाटिंग की जा रही है, जिससे मानसून में भीषण जलभराव होगा।
पर्यावरण: अटल उपवन की हरियाली नष्ट होने से शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बिगड़ेगा।
यातायात: अवैध निर्माण से सड़कें संकरी हो जाएंगी, जिससे पीडी नगर जैसे रिहायशी इलाकों में जाम की स्थिति बनी रहेगी।
आंदोलन की चेतावनी: “ईंट से ईंट बजा देंगे”
सभासदों ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि यदि एक सप्ताह के भीतर अवैध कब्जे नहीं हटाए गए और संबंधित भू-माफियाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई, तो वे कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक भूमि विवाद नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति की लूट है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
चुप्पी साधे हुए है प्रशासन
इस गंभीर मामले में जब सदर तहसील के अधिकारियों और पुलिस प्रशासन से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो कोई भी कैमरे के सामने बोलने को तैयार नहीं हुआ। अधिकारियों की यह



