-आर के श्रीवास्तव: प्रमुख संवाददाता
साइबर जालसाजों का आतंक
एटीएम कार्ड बदलकर लोकतन्त्र सेनानी की कमाई ले उड़े — साइबर जालसाज़ों ने पांच लोगों से कुल ₹16.53 लाख निकाले;
पीजीआई में मौका-ए-कार्रवाई की मांग
लोकतंत्र सेनानी शिक्षिका के खाते से 1.66 लाख की ठगी।
लखनऊ। राजधानी में साइबर फ्रॉड और एटीएम-ठगी का ग्राफ खतरनाक तरीके से बढ़ा है। पिछले कुछ दिनों में जानकीपुरम, गोमतीनगर, इंदिरानगर और पीजीआई थाना क्षेत्रों में दर्ज मामलों में कम से कम पांच पीड़ितों से कुल ₹16.53 लाख की ठगी सामने आई है — जिनमें से सबसे संवेदनशील और गंभीर मामला पीजीआई के वृंदावन योजना की निवासी और लोकतंत्र सेनानी विद्या देवी श्रीवास्तव के साथ हुआ। विद्या देवी (आयु 85 वर्ष) के खाते से एटीएम कार्ड बदलकर लगातार निकासी और खरीदारी कर ₹1,66,498/- उड़ा लिए गए — और उन्होंने इस संबंध में पीजीआई कोतवाली में FIR दर्ज करवाई है।
विद्या देवी के साथ क्या हुआ
4 सितंबर को विद्या देवी ने PNB के आकाश एनक्लेव एटीएम से खुद ₹25,000 निकाले। उसी समय उनके असली डेबिट-कार्ड की जगह अनजाने में किसी और का कार्ड रख दिया गया। बाद की बैंक स्टेटमेंट से स्पष्ट हुआ कि उनके कार्ड (या खाते) से 9 से 14 सितंबर के बीच कई अलग-अलग एटीएम और POS से लगातार निकासी और खरीदारी हुई।
पुलिस ने किया FIR दर्ज
बैंक स्टेटमेंट और FIR में जिन एटीएम ट्रांजैक्शनों का हवाला दिया गया है, उनमें लखनऊ-तेलीबाग, फैजाबाद-OATM, गाजियाबाद-Johri Enclave, शिकोहाबाद-Subhash Tiraha और लुलु मॉल-Oasis Retails (LEVIS) जैसी लोकेशन्स शामिल हैं — कुल मिलाकर ₹1,66,498/- की अवैध निकासी/खरीददारी दर्ज की गई।
FIR में यह भी दर्शाया गया कि पीड़िता के पंजीकृत मोबाइल पर अलर्ट समय पर नहीं पहुंचे (रिचार्ज न होने के कारण), जिससे धोखाधड़ी को समय रहते पकड़ा नहीं जा सका; FIR 01/10/2025 को PIजी थाना में दर्ज है और जांच उपनिरीक्षक धीरेंद्र कुमार वर्मा को सौंपी गई है।
शहर में पैटर्न — यही अकेला मामला नहीं
विद्या देवी का मामला अकेला किस्सा नहीं है — उसी अवधि में अलग-अलग तरीकों से लोगों को निशाना बनाकर मोटी रकम ऐंठी गई:
जानकीपुरम निवासी राहुल सिंह को टेलीग्राम-ग्रुप ‘फ्रीलांस जॉब’ के झांसे में लाकर ₹11.92 लाख तक ट्रांसफर कराए गए।
गोमतीनगर के प्रथम शर्मा से फ्रेंचाइजी का झांसा देकर ₹1.35 लाख और इंदिरानगर की देवयानी माथुर से इंस्टाग्राम पर वर्क-फ्रॉम-होम के नाम पर ₹2.50 लाख ठग लिए गए।
रॉयल सिटी निवासी अर्चना दीक्षित को फेसबुक मैसेंजर पर धमका-कर ₹10,000 कराए गए।
इन मामलों को मिलाकर ठगी की कुल राशि ₹16.53 लाख बनती है — जो दर्शाता है कि अपराधी सोशल-MEDIA, फेक जॉब-ऑफर और एटीएम-ट्रिक जैसे संयुग्म तरीके अपना रहे हैं (यह समेकित रिपोर्टिंग पर आधारित सारांश है)।
क्यों यह मामला गंभीर है — और पुलिस से क्या अपेक्षा होनी चाहिए
पीड़िता एक वरिष्ठ नागरिक, पूर्व-शिक्षिका और लोकतंत्र सेनानी हैं; ऐसे नागरिकों के साथ हुई ठगी का सार्वजनिक और प्रशासनिक संज्ञान तेज होना चाहिए। FIR का उपलब्ध रिकॉर्ड दर्शाता है कि कार्ड-स्वैपिंग/डिस्ट्रैक्शन तकनीक इस्तेमाल की गई।
कई जिलों/शहरों के एटीएम/बिंदुओं पर निकासी हुई है, इसलिए मामले की तकनीकी जाँच (वायर-लैटेंसी, ATM/POS-CCTV, बैंक-लॉग, beneficiary-accounts का ट्रेस) केंद्रीय साइबर/एटीएम-रेटेड यूनिट के साथ मिलकर करनी चाहिए।
पीड़िता का कहना है कि मोबाइल रिचार्ज न होने के कारण SMS अलर्ट नहीं पहुंचे — यह बैंक-ग्राहक सुरक्षा का एक कमजोर पहलू उजागर करता है, पर जिम्मेदारी बैंक-पुलिस संयुक्त जांच से तय होगी।
पुलिस की जांच दिशा
पुलिस बैंक और एटीएम बूथों के साथ-साथ लुलु मॉल के Oasis Retails स्टोर के CCTV फुटेज खंगाल रही है ताकि यह पता चल सके कि एटीएम कार्ड किसने बदला और किसने इन लेनदेन को अंजाम दिया। साथ ही, FIR में दर्ज कार्ड नंबर और संदिग्ध व्यक्ति पंकज (उन्नाव निवासी) के खाते की भी जांच की जा रही है, जिससे अपराध की कड़ी तक पहुँचा जा सके।
सार्वजनिक अपील
वरिष्ठ नागरिक, अकेले उपलब्ध लोगों और ऑनलाइन-नौकरी तलाशने वालों के लिए सिटी-पुलिस एक छोटा, तेज़—“one-line” सूचना/वॉर्निंग जारी करे (एटीएम पर सावधानी, अनजान लिंक न खोलें, मोबाइल अलर्ट सक्रिय रखें)।
लखनऊ में साइबर अपराध का बढ़ता जाल
राष्ट्रीय व स्थानीय मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि साइबर अपराध और डिजिटल फ्रॉड के मामले पूरे प्रदेश व शहर में तेज़ी से बढ़े हैं — NCRB के आंकड़ों और हालिया कवरेज के मुताबिक लखनऊ में साइबर केसेस में उछाल आया है और पुलिस/एसटीएफ ने कुछ बड़े रैक्स को तोड़ा भी है, पर जनसंख्या के हिसाब से मामलों की संख्या चिंताजनक बनी हुई है।
सार्वजनिक जवाबदेही और शीघ्र कार्रवाई की आवश्यकता
विद्या देवी जैसे सम्मानित नागरिक के साथ हुई यह ठगी केवल एक व्यक्तिगत नुकसान नहीं — यह लखनऊ-वासियों के लिये चेतावनी है। जब पीड़ित-व्यक्ति सार्वजनिक राहत-कारक, लोकतंत्र सेनानी और बुजुर्ग हों तो प्रशासन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। इस रिपोर्ट के आधार पर हम यही माँग करते हैं: पीजीआई थाने व साइबर क्राइम शाखा मामले को प्राथमिकता दें, CCTV एवं बैंक-लॉग शीघ्र उपलब्ध कराएँ और सार्वजनिक रूप से जांच की प्रगति साझा करें — ताकि आम लोगों का विश्वास बना रहे और अपराधियों पर पकड़ मजबूत हो।
FIR का विवरण और समय-रूपरेखा पीड़िता द्वारा पुलिस में प्रस्तुत कर दी गई है।



