
फतेहपुर/बांदा: विकास के दावों की धज्जियां उड़ाती यह रिपोर्ट फतेहपुर जनपद के असोथर थाना क्षेत्र से है, जहां ‘सड़क’ और ‘खंदक’ के बीच का अंतर समाप्त हो चुका है। बांदा के मरका घाट (खंड संख्या 3 और 4) से शुरू हुआ अवैध और नियमविरुद्ध खनन का खेल अब फतेहपुर की सड़कों के लिए काल बन गया है।
जलधारा रोककर निकाला जा रहा ‘काला सोना’
बांदा के मरका घाट पर नियमों को ताक पर रखकर जलधारा को बांध दिया गया है। पानी के भीतर से निकाली जा रही गीली मौरंग को जब ओवरलोड ट्रकों में भरकर निकाला जाता है, तो इन ट्रकों से रिसता हुआ पानी सड़कों को गला रहा है।
असोथर बना ‘डेड जोन’, हर कदम पर मौत का साया
असोथर से थरियांव मार्ग अब चलने लायक नहीं बचा है, बल्कि यह एक ‘डेड जोन’ में तब्दील हो चुका है। ओवरलोडिंग के कारण सड़कों का सीना फट चुका है और पूरी सड़क ध्वस्त हो गई है। मुख्य रूप से इन स्थानों पर स्थिति भयावह है
असोथर तिराहा: यहां बड़े-बड़े गड्ढे हादसों को न्योता दे रहे हैं।
वनपुरवा मोड़ व मेडीबाबा मोड़: यहां सड़क पूरी तरह गायब है, सिर्फ गड्ढे शेष हैं।
रामकिशोर सिंह इंटर कॉलेज छात्रों के भविष्य के सामने गहरे गड्ढों का खतरा मंडरा रहा है।
बहरामपुर ओवरब्रिज: यहां पुल के पास गहरे खंदक बन गए हैं, जिससे भारी वाहन कभी भी पलट सकते हैं।
थरियांव क्षेत्र: यहां भी सड़क का नामोनिशान मिट चुका है।
हिलते पुल और असुरक्षित पुलिया
असोथर क्षेत्र के पुल और पुलिया ओवरलोड ट्रकों के भार से थरथरा रहे हैं। पुलों के ‘अप्रोच’ (संपर्क मार्ग) अभी तक नहीं भरे गए हैं, जिससे किसी भी दिन बड़ा पुल हादसा होने की संभावना बनी रहती है।
सफेद मौरंग पर खून के धब्बे:भीषण दुर्घटनाएं
सड़क की जर्जर हालत और अनियंत्रित ओवरलोडिंग ने आज भी कई जिंदगियों को संकट में डाल दिया। क्षेत्र में आज हुई भीषण सड़क दुर्घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि इस मार्ग पर चलना ‘मौत को दावत’ देने जैसा है। स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है कि आखिर इन मौतों और ध्वस्त होती संपत्ति का जिम्मेदार कौन है? क्या प्रशासन किसी बड़ी तबाही का इंतजार कर रहा है?
NGT के आदेशों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन
NGT के नियमानुसार, किसी भी स्थिति में नदी की प्राकृतिक जलधारा को बाधित नहीं किया जा सकता और न ही जलधारा के भीतर से पोकलैंड मशीनों के जरिए मौरंग निकाली जा सकती है। लेकिन मरका घाट पर जलधारा को बांधकर बीच नदी से मौरंग निकाली जा रही है। यह न केवल जलीय पारिस्थितिकी के लिए घातक है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट और NGT के आदेशों की सीधी अवमानना है।
ओवरलोडिंग और गीली मौरंग,सड़कों के लिए ‘स्लो पॉइजन
NGT के नियम यह भी कहते हैं कि खनन क्षेत्र से सूखी मौरंग का परिवहन होना चाहिए, लेकिन मरका घाट से सीधे पानी से निकली गीली मौरंग ट्रकों में लादी जा रही है। ट्रकों से रिसता पानी सड़कों को गला रहा है।



