
फतेहपुर। राधानगर थाना क्षेत्र के बहुआ इलाके में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बहुआ रोड क्रॉसिंग पुल के पहले “शिव मेडिकल स्टोर” के नाम से संचालित एक दुकान के भीतर कथित तौर पर अवैध तरीके से छोटा अस्पताल चलाए जाने की बात सामने आ रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां बिना किसी वैध पंजीकरण, बिना मान्यता प्राप्त डॉक्टर और बिना जरूरी स्वास्थ्य मानकों के मरीजों का इलाज खुलेआम किया जा रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह सब लंबे समय से चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक सिर्फ “कार्रवाई का आश्वासन” देने तक सीमित हैं।
चार–पांच बेड, ग्लूकोज की बोतल और शुरू हो जाता है इलाज
ग्रामीणों के मुताबिक मेडिकल स्टोर के अंदर ही चार से पांच बेड लगाए गए हैं। जैसे ही कोई मरीज बुखार, कमजोरी या शरीर दर्द जैसी सामान्य शिकायत लेकर पहुंचता है, उसे तुरंत बेड पर लिटाकर ग्लूकोज की बोतल चढ़ा दी जाती है। इसके साथ ही इंजेक्शन और दवाइयों का सिलसिला शुरू हो जाता है बिना यह देखे कि इलाज करने वाला व्यक्ति प्रशिक्षित है या नहीं।
गरीब और अनजान लोगों को बनाया जा रहा निशानास्थानीय लोगों का कहना है कि आसपास के गांवों से आने वाले गरीब और अनजान मरीज जल्दी ठीक होने की उम्मीद में यहां पहुंच जाते हैं। आरोप है कि मरीजों को बीमारी का डर दिखाकर अनावश्यक ड्रिप और इंजेक्शन लगाए जाते हैं, और बदले में उनसे मोटी रकम वसूली जाती है। साधारण बीमारी को भी गंभीर बताकर इलाज का बिल” बढ़ा दिया जाता है।
लंबे समय से चल रहा खेल, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं सूत्रों के अनुसार यह कथित अस्पताल काफी समय से इसी तरह संचालित हो रहा हैमेडिकल स्टोर के नाम पर मरीजों को भर्ती करना और ड्रिप लगाकर इलाज करना सीधे तौर पर स्वास्थ्य विभाग के नियमों का उल्लंघन है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
जेपी मेडिकल रटोर भी चर्चा में
क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि पास ही जेपी क्लिनिक के नाम से एक और केंद्र संचालित हो रहा है, जहां इसी तरह चार पांच बेड डालकर मरीजों को भर्ती कर ग्लूकोज और इंजेक्शन दिए जाते हैं। यदि इन संस्थानों के पास वैध पंजीकरण और प्रशिक्षित डॉक्टर नहीं हैं, तो यह सीधे-सीधे मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ माना जा रहा है।
क्या स्वास्थ्य विभाग बड़ी घटना का इंतजार कर रहा हैसबसे बड़ा सवाल यही है जब इस पूरे मामले की जानकारी स्थानीय स्तर पर बार-बार दी जा रही है, तो स्वास्थ्य विभाग आखिर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा? क्या विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
यदि किसी मरीज की हालत अचानक बिगड़ जाए, तो वहां न तो इमरजेंसी सुविधा है न प्रशिक्षित स्टाफ और न ही उचित चिकित्सा उपकरण। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
जांच और कार्रवाई की मांग तेज- स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि बहुआ रोड और आसपास के इलाकों में चल रहे ऐसे मेडिकल स्टोर और क्लीनिकों की तत्काल जांच कराई जाए। यदि मेडिकल स्टोर की आड़ में अवैध अस्पताल संचालित हो रहा है, तो उसे तुरंत बंद कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
अब बड़ा सवाल यह हैक्या जिम्मेदार विभाग समय रहते जागेगा, या फिर किसी बड़ी घटना के बाद ही कार्रवाई होगी-



