
कन्नौज: इत्र नगरी कन्नौज में त्योहारों की आहट के साथ ही बाजारों में रौनक तो लौट आई है, लेकिन इस चमक के पीछे मिलावटखोरी का काला खेल भी शुरू हो गया है। इन दिनों शहर के मुख्य बाजारों से लेकर गली-मोहल्लों की दुकानों पर चटक रंगों वाली कचरी और पापड़ खुलेआम बिक रहे हैं। ₹160 से ₹200 प्रति किलो की दर पर मिलने वाले ये आकर्षक चिप्स और पापड़ असल में सेहत के लिए धीमा जहर साबित हो रहे हैं।
आकर्षक रंग, जानलेवा रसायन
बाजारों में मिल रही लाल, पीली और हरी कचरी को लुभावना बनाने के लिए जिन रंगों का इस्तेमाल हो रहा है, वे कपड़े रंगने वाले औद्योगिक रंग हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इन सिंथेटिक रंगों में लेड (सीसा), क्रोमियम और कैडमियम जैसे भारी तत्व पाए जाते हैं। ये रसायन सीधे हमारे लिवर और किडनी पर प्रहार करते हैं। लंबे समय तक इनके सेवन से शरीर के महत्वपूर्ण अंग काम करना बंद कर सकते हैं।
मैदा और आरारोट का ‘जाल’
शुद्ध आलू के चिप्स और पापड़ के नाम पर बिकने वाला यह सामान वास्तव में मैदा और घटिया किस्म के आरारोट का मिश्रण है।
मैदा का खतरा: मैदा में फाइबर की मात्रा शून्य होती है, जिसके कारण यह आंतों की दीवारों पर चिपक जाता है। इससे न केवल कब्ज और मोटापे की समस्या होती है, बल्कि पाचन तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो सकता है।
आरारोट का जोखिम: मिलावटी आरारोट रक्त में शुगर लेवल को अचानक बढ़ा देता है, जो मधुमेह (Diabetes) के रोगियों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
इस गंभीर मुद्दे पर जिला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर शक्ति बसु ने बताया कि, “बाजार में मिलने वाले चटक रंगों वाले खाद्य पदार्थ सीधे तौर पर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों को निमंत्रण दे रहे हैं। ये रसायन न केवल पेट खराब करते हैं, बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी खत्म कर देते हैं। जनता को सलाह दी जाती है कि वे केवल प्राकृतिक और भरोसेमंद स्थानों से ही खाद्य सामग्री खरीदें।”


