
कन्नौज: परिवहन निगम यात्रियों को बेहतर और सुगम यात्रा का भरोसा तो देता है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट है। कन्नौज डिपो में परिसर से लेकर बसों के भीतर तक फैली अव्यवस्था और गंदगी ने यात्रियों का जीना मुहाल कर दिया है। स्थिति यह है कि डिपो परिसर में कदम रखते ही यात्रियाें को गंदगी और उनसे उठती दुर्गंध के कारण अपनी नाक सिकोड़नी पड़ती है।
रोडवेज बसों में सफर करने वाले यात्रियों को सुविधाओं के नाम पर सिर्फ गंदगी नसीब हो रही है। बसों की सीटों के नीचे और कोनों में कहीं मूंगफली के छिलके बिखरे पड़े हैं, तो कहीं गुटखे की पुड़िया और थूक के दाग दिखाई देते हैं। साफ-सफाई के अभाव में सीटों पर धूल की मोटी परत जमी रहती है। आलम यह है कि गंदी सीटों और फर्श के बीच यात्री अपनी यात्रा पूरी करने को मजबूर हैं। वहीं इन बसों में यात्रा करने वाले यात्रियों का कहना है कि बसों की रोजाना सफाई केवल कागजों पर ही होती है, हकीकत में बसें हफ्तों साफ नहीं की जाती हैं।

पेशाब घर की दुर्गंध से सांस लेना दूभर
डिपो परिसर में बना पेशाब घर नारकीय स्थिति में है। वहां से उठने वाली तीव्र दुर्गंध के कारण वहां खड़ा होना भी मुश्किल है। यात्री अपनी नाक पर कपड़ा या रुमाल रखकर वहां से गुजरने को मजबूर हैं। साफ-सफाई के अभाव में पेशाब घर में हमेशा गंदगी भरी रहती है, जिससे संक्रामक और गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है। वहीं महिलाओं और बुजुर्गों को इस स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है।
नलों पर जमी काई, पीने के पानी का संकट
डिपो में यात्रियों की प्यास बुझाने के लिए जो सरकारी नल लगाए गए हैं, उनकी हालत भी दयनीय है। नलों के आसपास के फर्श पर गंदगी और काई जमी रहती है, गंदगी के कारण यात्री इन नलों का पानी पीने से भी कतराते हैं। यात्रियों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देते हैं।
हर तरफ गंदगी से यात्रियों में रोष
डिपो की इस बदहाली पर यात्रियों में काफी रोष है। यात्रियों का कहना है कि वे पूरा किराया देते हैं, फिर भी उन्हें मूलभूत सुविधाएं और साफ-सफाई नहीं मिलती। ऐसे में उन्हें मजबूर होकर उन्हीं गंदी बसों में सफर करना पड़ता है।



