
जिला संवाददाता देवेंद्र तिवारी
उन्नाव। राजधानी मार्ग पर एक बार फिर रफ्तार का कहर देखने को मिला, जहाँ एक तेज़ रफ्तार कार और साइकिल के बीच हुई सीधी भिड़ंत में सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। इस हादसे में साइकिल सवार गंभीर रूप से चोटिल हुआ है, जबकि कार में सवार दो लोगों को भी चोटें आई हैं。 हालांकि, पुलिस की मौजूदगी में हुए आपसी सुलह-समझौते ने कानूनी कार्रवाई को तो रोक दिया, लेकिन यह घटना प्रशासन की सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
हादसे का घटनाक्रम: शांति मेडिकल सेंटर के पास हुई टक्कर
जानकारी के अनुसार, बुधवार को उन्नाव से कानपुर की ओर जा रही एक कार अनियंत्रित होकर शांति मेडिकल सेंटर के पास एक साइकिल सवार से टकरा गई। कार में कानपुर के दो निवासी सवार थे:
सुनील श्रीवास्तव: (42 वर्ष), पुत्र शिवसरन, निवासी विजयनगर, कानपुर नगर。
रूपेश खन्ना: (44 वर्ष), पुत्र श्याम सुंदर खन्ना, निवासी श्याम नगर, कानपुर नगर。
कार की टक्कर शुक्लागंज के कंचन नगर निवासी साइकिल सवार रामचंद्र राजपूत (पुत्र स्वर्गीय जमुना प्रसाद) से हुई。 टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया और रामचंद्र की साइकिल का पिछला पहिया टूटकर अलग हो गया。
तत्काल उपचार और आपसी समझौता
हादसे के तुरंत बाद मौके पर पहुँची पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सभी घायलों को पास के शांति मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया。 उपचार के बाद डॉक्टरों ने सुनील श्रीवास्तव, रूपेश खन्ना और रामचंद्र राजपूत की स्थिति सामान्य और खतरे से बाहर बताई है。
अस्पताल परिसर में ही पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई。 कानूनी पचड़ों और लंबी अदालती कार्रवाई से बचने के लिए कार सवारों और साइकिल सवार ने आपसी सहमति से सुलह-समझौता कर लिया, जिसके बाद पुलिस ने मामले को शांत घोषित कर दिया。
सरकार और PWD से तीखे सवाल: कब तक होगा ‘समझौता’?
भले ही इस विशेष मामले में समझौता हो गया हो, लेकिन क्या यह सड़कों की बदहाली का स्थायी समाधान है? न्यूज़ वेब के माध्यम से हम प्रशासन से जवाब मांगते हैं:
सुरक्षा ऑडिट कहाँ है? राजधानी मार्ग पर आए दिन होते हादसों के बावजूद PWD ने यहाँ ‘स्पीड कंट्रोल’ के उपाय क्यों नहीं किए?
शांति मेडिकल सेंटर के पास अक्सर सड़कों पर भीड़ और अवैध कट के कारण हादसे होते हैं, इन्हें बंद करने की ज़िम्मेदारी किसकी है?



