
संवाददाता सचिन पाण्डेय
उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में बेलगाम रफ्तार और बदहाल यातायात व्यवस्था ने एक और हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। बुधवार सुबह दही थाना क्षेत्र के कुमेदान खेड़ा के पास हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में 35 वर्षीय अमित की जान चली गई। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उन दावों की पोल खोलता है जहाँ सड़कों को सुरक्षित और सुरक्षित सफर की गारंटी दी जाती है।
अमित की मौत ने न केवल एक पत्नी का सुहाग छीना है, बल्कि दो मासूम बच्चों के भविष्य पर भी अंधेरा छा दिया है। सवाल यह है कि आखिर कब तक मासूम लोग इन ‘अज्ञात वाहनों’ का शिकार बनते रहेंगे और प्रशासन कब गहरी नींद से जागेगा?
“जरूरी काम है, अभी आता हूँ”… कहकर निकला था अमित
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुमेदान खेड़ा निवासी अमित (पुत्र स्वर्गीय राम अवतार) बुधवार सुबह करीब 8 बजे घर से यह कहकर निकला था कि वह किसी जरूरी काम से जा रहा है। उसे क्या पता था कि घर की दहलीज पार करते ही यमराज उसकी राह देख रहे हैं। गाँव के पास ही सड़क पर एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि अमित लहूलुहान होकर वहीं तड़पने लगा।
स्थानीय लोगों के शोर मचाने पर परिजन मौके पर दौड़े। खून से लथपथ अमित को आनन-फानन में नवाबगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
उजड़ गया आशियाना: दो मासूमों का अब कौन होगा सहारा?
अमित अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। वह दिन-भर मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार की गाड़ी खींच रहा था। उसकी मौत के बाद:
पत्नी रानी: सदमे में है और उसका रो-रोकर बुरा हाल है।
बेटा हर्ष और बेटी कामिनी: ये दोनों मासूम अभी यह समझ भी नहीं पा रहे हैं कि जिस पिता की उंगली थामकर वे कल तक घूमते थे, वह अब कभी वापस नहीं आएगा।
गाँव वालों का कहना है कि अमित बहुत ही सीधा और मेहनती युवक था। उसकी मौत से पूरे गाँव में मातम छाया हुआ है और हर कोई प्रशासन की सुस्ती पर सवाल उठा रहा है।
प्रशासन और सरकार से सीधे सवाल
यह घटना उन्नाव की यातायात व्यवस्था और पुलिस पेट्रोलिंग पर गंभीर प्रश्न चिह्न लगाती है:
अज्ञात वाहन का खौफ: आखिर हाईवे और संपर्क मार्गों पर सीसीटीवी (CCTV) कैमरों का जाल क्यों नहीं है? क्यों हर बार अपराधी टक्कर मारकर फरार हो जाते हैं और पुलिस के हाथ ‘अज्ञात’ का लेबल रह जाता है?
स्पीड कंट्रोल का अभाव: रिहायशी इलाकों और गांवों के पास से गुजरने वाली सड़कों पर गति सीमा (Speed Limit) को नियंत्रित करने के लिए स्पीड ब्रेकर या पुलिस पिकेट क्यों नहीं लगाई जाती?
मुआवजे पर चुप्पी: क्या सरकार इस गरीब और बेसहारा हुए परिवार के लिए आर्थिक सहायता का हाथ बढ़ाएगी, या यह फाइल भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के नीचे दबकर रह जाएगी?
पुलिस की कार्रवाई: जांच या खानापूर्ति?
दही थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और अज्ञात वाहन की तलाश जारी है। लेकिन स्थानीय लोगों का अनुभव कहता है कि ‘अज्ञात’ के खिलाफ मामले अक्सर फाइलों में ही दफन हो जाते हैं।



