
जिला संवाददाता देवेंद्र तिवारी
उन्नाव। ओवरलोड ट्रकों का खेल धीरे धीरे खुलता जा रहा है। जिले में लंबे समय से चल रही यह मिलीभगत आखिरकार उजागर हुई, तो परिवहन विभाग में खलबली मच गई। तीन सिपाहियों पर गाज गिर चुकी है, जबकि दो एआरटीओ के खिलाफ भी कार्रवाई तय मानी जा रही है। मामला सामने आने के बाद से दोनों अधिकारी दफ्तर से गायब हैं और प्रवर्तन का काम ठप पड़ा है। नतीजा यह कि सड़कें ओवरलोड वाहन ढो रहे हैं और राजस्व का नुकसान अलग।
कैसे खुला पूरा खेल
बताया जा रहा है कि सिंडीकेट ट्रकों की लोकेशन अधिकारियों तक पहुंचाता था, जिसके बदले ओवरलोड वाहन जिले की सीमा से आराम से गुजर जाते थे। गिट्टी, मौरंग और बालू से भरे ट्रकों से वसूली होने वाली रकम में सिपाहियों के साथ साथ प्रवर्तन से जुड़े अफसरों तक हिस्सा पहुंचता था। यह काम कोई नया नहीं था, आरोपितों के मुताबिक लगभग दो साल से यह नेटवर्क सक्रिय था और सैकड़ों ट्रकों को पास कराने की बात सामने आई है।
एसटीएफ की कार्रवाई और दर्ज एफआईआर
11 नवंबर 2025 को कानपुर एसटीएफ के दारोगा राहुल सिंह परमार ने इस रैकेट का खुलासा किया। तत्काल पांच लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ जिनमें सुनील सचान, प्रदीप सिंह, श्रीकिशन, तारिक और नियाज अहमद के नाम शामिल हैं। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि यह खेल प्रवर्तन सिपाही प्रदीप, रंजीत और सुरेंद्र की मिलीभगत से चलता था।
एफआईआर के बाद अधिकारियों की भूमिका सवालों में
मामला दर्ज होने के बाद से एआरटीओ और पीटीओ दोनों छुट्टी पर हैं। 24 नवंबर को एआरटीओ प्रशासन श्वेता वर्मा ने भी बताया था कि सभी प्रवर्तन अधिकारी खुद को अनुपस्थित कर गए हैं और उन्हें ही कार्यभार संभालना पड़ रहा है। परिवहन निदेशालय ने तीनों आरोपी सिपाहितों प्रदीप, रंजीत और सुरेंद्र को फिलहाल निलंबित कर दिया है। लेकिन जिस स्तर पर यह खेल चलता रहा, उससे बड़े अधिकारियों की भूमिका पर सवाल और गंभीर हुए हैं।
सड़कें बेपटरी, विभाग की आय में गिरावट
बिना प्रवर्तन के हाईवे और मुख्य मार्गों पर ओवरलोड वाहन तेज रफ्तार में दौड़ रहे हैं। कहीं फिटनेस की जांच नहीं, कहीं चालान की कार्रवाई नहीं। एआरटीओ श्वेता वर्मा का कहना है कि सड़कों पर अफसरों की मौजूदगी न होने से अराजकता बढ़ रही है और राजस्व भी नीचे गिरा है। अनियंत्रित डंपर और ट्रक हर दिन मौत का जोखिम लेकर गुजर रहे हैं और विभाग उन्हें देखने वाला कोई नहीं।
ओवरलोड सिंडीकेट का नेटवर्क गहरा, अब कार्रवाई का इंतजार
कुल मिलाकर यह सिर्फ निलंबन तक सीमित मामला नहीं दिखता। जिस तरह आरोपितों ने कबूल किया कि करीब दो वर्ष से वसूली कर ट्रक पास कराए जा रहे थे, उससे साफ है कि जाल ऊंचे स्तर तक फैला हुआ था। अब निगाहें इस बात पर हैं कि विभाग उच्चाधिकारियों पर कार्रवाई कब तय करता है और यह गड़बड़ी कहां तक जाती है। यह पूरा प्रकरण इस बात का उदाहरण है कि जब प्रवर्तन ढीला पड़े तो न सिर्फ भ्रष्टाचार पनपता है, बल्कि सड़क सुरक्षा भी सीधे खतरे में पड़ जाती है। जिले के लोग अब उम्मीद लगाए हैं कि जांच सिर्फ सिपाहियों तक न रुके, बल्कि पूरा नेटवर्क सामने आए और जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई हो।



