
ब्यूरो ऋषभ तिवारी
उन्नाव।।पिछले कई दिनों से लगातार रुक रुक कर हो रही बारिश और मौसम के खराब रहने से जिले भर में धान व उड़द की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो रही हैं। किसानों की मेहनत पर प्रकृति की मार पड़ने से गांव-गांव में मायूसी का माहौल है। खेतों में लगी फसलें पानी में डूब रही हैं, वहीं जो फसलें किसी तरह बची हुई थीं, वे भी सड़ने लगी हैं। आम तौर पर किसान धान व उड़द की फसल बेचकर प्राप्त आय से गेहूं की बुवाई की तैयारी करते हैं और इसी आय से पारिवारिक खर्चों की पूर्ति भी करते हैं। लेकिन इस बार दीपावली के बाद रुक रुक कर हो रही बारिश और मौसमी तूफान ने किसानों के सभी सपनों पर पानी फेर दिया।
कई स्थानों पर खेतों में कटाई की प्रतीक्षा कर रही धान की फसलें पूरी तरह गिर गईं हैं, कहीं खेतों मे कटी पड़ी है जबकि उड़द भी खेतों मे ही कटी पड़ी है जिनकी फलियां सड़ने लगी हैं। जो फसलें अब भी खेतों में बची हुई हैं, उनके भी पुनः अंकुरित (फिर से उग आने) होने की संभावना बन गई है, जिससे उनकी बाजार में कोई कीमत नहीं बचेगी।किसानों का कहना है कि लगातार हो रही बरसात ने खेती की जमीन को दलदल में बदल दिया है, ऐसे में गेहूं की बुवाई भी समय पर नहीं हो पाएगी। यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो रबी की फसलें भी प्रभावित होंगी।
लखनऊ के सरोजिनी नगर क्षेत्र गौरी, बिजनौर, बंथरा, बनी, हरौनी, चंद्रावल, भदरसा, मोहनलालगंज, मलिहाबाद, काकोरी, आदि क्षेत्रों व उन्नाव के चौपई, दरेहटा, असोहा, सकरन, अजगैन, हसनगंज, पुरवा, बांगरमऊ, बीघापुर, भगवंत नगर, सफीपुर आदि क्षेत्र के किसानों ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर धान व उड़द की खेती की थी, लेकिन अब पूरी फसल नष्ट हो जाने से ऋण चुकाना भी मुश्किल हो गया है।किसानों ने शासन-प्रशासन से फसल सर्वे कराने और उचित मुआवजा देने की मांग की है ताकि वे कम से कम आगे गेहूं की बुवाई कर सकें और परिवार का भरण-पोषण जारी रख सकें। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकार ने तत्काल राहत न दी, तो किसान आर्थिक संकट और मानसिक तनाव की स्थिति में पहुंच सकते हैं।



