
फतेहपुर । जिले के गाजीपुर थाना क्षेत्र के चकस्करन गांव में प्रशासन की आँखों के सामने सुबह पाँच बजे से शराब बिक्री का खेल खुलेआम चल रहा है। गाँव के बाहर सड़क किनारे बने देशी शराब के ठेके और बगल की पान गुमटी पर तड़के ही शराब बिकनी शुरू हो जाती हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि यह धंधा कोई दिन–दो दिन का नहीं, बल्कि वर्षों पुराना है। ग्रामीणों के अनुसार, पुलिस और आबकारी विभाग के कुछ कर्मियों की मिलीभगत के चलते इस अवैध बिक्री पर कभी ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई।
भोर में खुलता ठेका, गुमटी से शुरू होती बिक्री
ग्रामीणों के अनुसार, ठेके के सेल्समैन ने दुकान के पीछे एक गुप्त अड्डा बना रखा है। वहीं शराब छिपाई जाती है और भोर होते ही पान गुमटी से बिक्री शुरू हो जाती है।स्थानीयों ने बताया कि पाउच की कीमत तय दर से कहीं ज्यादा वसूली जा रही है। “₹110 से ₹120 तक प्रति पाउच बेचा जा रहा है, जबकि तय दर कम है,” एक उपभोक्ता ने बताया।गांव के लोगों ने कहा कि “हमने कई बार शिकायत की, पत्रकारों ने भी खबरें चलाईं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दिखावा हुआ। ठेका और गुमटी रोज़ सुबह एक तय समय पर खुलते हैं, और उसी समय पुलिस गश्त गायब रहती है।
सेवा शुल्क’ के नाम पर हर माह वसूली का खेल
खागा सर्किल के एक देशी शराब सेल्समैन ने नाम न छापने की शर्त पर बड़ा खुलासा किया। उसके मुताबिक, “हर ठेके से हर महीने आबकारी और पुलिस कर्मियों को सेवा शुल्क के नाम पर रुपये लिए जाते हैं।”

सेल्समैन का दावा है कि थाने में तीन से पाँच हजार रुपये और आबकारी विभाग के कारखास सिपाहियों को भी उतनी ही रकम दी जाती है ताकि दुकान बिना रोकटोक चल सके।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आबकारी विभाग के कारखास सिपाही आरिफ पूरे क्षेत्र में महीनवारी वसूली की व्यवस्था संभालता है। बताया गया कि आरिफ की थाने और ठेकेदारों से मजबूत “सेटिंग” है, जिसके चलते कोई कार्रवाई नहीं होती।यह जानकारी स्थानीय लोगों और एक सेल्समैन के आरोपों पर आधारित है। प्रशासन या संबंधित व्यक्तियों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।गांव के लोगों ने बताया कि शराब बिक्री से समाजिक माहौल बिगड़ चुका है। “सुबह से ही शराबी सड़क पर हंगामा करते हैं। झगड़े, घरेलू हिंसा और गाली-गलौज की घटनाएँ रोज़ की बात बन गई हैं,एक महिला ने बताय कि प्रशासन अगर अब भी नहीं जागा, तो हालात विस्फोटक हो सकते हैं।
सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सवाल
राज्य सरकार लगातार अवैध शराब पर सख्ती के दावे करती है, लेकिन चकस्करन में चल रही यह ‘सुबह पाँच बजे वाली मंडी’ उन दावों की पोल खोल रही है।
लोग पूछ रहे हैं कि अगर थाने से कुछ दूरी पर सुबह तड़के शराब बिक सकती है, तो क्या यह बिना संरक्षण संभव है?ग्रामीणों ने तंज कसा कि “यहाँ कानून सिर्फ कागज़ों में है, मैदान में नहीं। उनका कहना है कि जब तक अधिकारी खुद मौके पर नहीं पहुंचेंगे, तब तक यह अवैध कारोबार बंद नहीं होगा।लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल एक ठेके या एक गांव का नहीं है। “अगर आज चकस्करन में सब कुछ खुलकर चल सकता है, तो कल यही हाल दूसरे गांवों में भी होगा,” एक बुजुर्ग ग्रामीण बोले।उन्होंने कहा कि जिले में ऐसे कई ठेके हैं जहाँ आबकारी और पुलिस की मिलीभगत से शराब बिक्री अवैध समय में भी होती है।अब वक्त है कि जिला प्रशासनऔरआबकारी विभाग की जवाबदेही तय हो — ताकि यह सिलसिला थमे और कानून की साख बच सके।



