
संवाददाता सचिन पाण्डेय
उन्नाव।।जब पूरा देश दीपावली की रोशनी में नहाया था, तब नवाबगंज CHC (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) के वार्ड अंधेरे में गुमसुम पड़े थे। बाहर पटाखे गूंज रहे थे, अंदर मरीज कराह रहे थे और प्रशासन? वो तो शायद छुट्टी मना रहा था।
मंगलवार की रात एक मरीज़ को भर्ती किया गया, लेकिन न चादर मिली, न पंखा चला। तीमारदारों ने मदद मांगी, पर जवाब में मिली सिर्फ़ “देखते हैं” और “कोई नहीं है अभी” जैसी क्लासिक सरकारी स्क्रिप्ट।
घंटों की जद्दोजहद के बाद जब हालात बेकाबू होने लगे, तो आखिरकार पुलिस को कॉल करना पड़ा। 112 पर फोन गया और वर्दीवाले पहुंचे भी लेकिन इलाज या सुविधा की गारंटी तो उनके बस में भी नहीं।
अब सवाल ये है कि अगर मरीजों को पानी, पंखा और चादर के लिए भी पुलिस बुलानी पड़े, तो फिर अस्पताल में स्टाफ किस काम का?
CMO ऑफिस से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक, हर बार दावा किया जाता है कि स्टाफ ड्यूटी पर है, सब ठीक है। लेकिन ज़मीनी हालात बता रहे हैं कि ‘ठीक’ सिर्फ़ कागज़ों में है, हकीकत में तो व्यवस्थाएं ICU में पड़ी हैं।



