
नेवी नेवल यूटिलिटी हेलिकॉप्टर की काफी वक्त से मांग कर रही है। अभी जो चेतक हेलिकॉप्टर हैं इनका एंडयोरेंस कम हैं यानी वह कम वक्त तक हवा में रह सकते हैं। जबकि नेवी की जरूरत के हिसाब से ज्यादा एंडयोरेंस वाले आधुनिक हेलिकॉप्टर की जरूरत है। नेवी ने स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप मॉडल के तहत यूटिलिटी हेलिकॉप्टर लेने का केस आगे बढ़ाया था। लेकिन एचएएल (Hindustan Aeronotics Limited) की तरफ से कहा गया कि वे नेवी के लिए नए यूटिलिटी हेलिकॉप्टर बनाएंगे। जिसके बाद स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप मॉडल के तहत हेलिकॉप्टर लेने का प्रस्ताव लटक गया। हालांकि पॉजिटिव इंडियनाइजेशन लिस्ट में नाम होने के बावजूद स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप मॉडल के तहत इंडियन वेंडर से हेलिकॉप्टर लेने का विकल्प खत्म नहीं हुआ है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक मंत्रालय में हायर अथॉरिटी चाहती है कि या तो स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप प्रपोजल में एचएएल को भी मौका दिया जाए या फिर एचएएल से ही हेलिकॉप्टर लिया जाए।
‘एचएएल के बनाए हेलीकॉप्टर नेवी की जरूरतों को पूरा नहीं करता’
सूत्रों के मुताबिक अभी एचएएल ने जो हेलिकॉप्टर बनाए वह नेवी की जरूरतों को पूरा नहीं करता। हालांकि एचएएल ने इनमें बदलाव की बात कही है। एक अधिकारी के मुताबिक नेवी की जरूरत आर्मी और एयरफोर्स से अलग है। समंदर में इस्तेमाल करने के लिए अलग तरह के मल्टीरोल हेलिकॉप्टर की जरूरत होती है। जमीन में लैंडिंग के लिए हेलिकॉप्टर किसी भी दिशा से आ सकता है लेकिन चलते हुए शिप में ऐसा मुमकिन नहीं हो पाता, हालांकि ब्लेड सिस्टम और रोटर हेड के डिजाइन के जरिए इस कमी को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।
ब्ले़ और टेल फोल्ड वाले हेलीकॉप्टर की जरूरत
एंटी सबमरीन वॉरफेयर में हेलिकॉप्टर को बहुत नीचे उड़ना पड़ता है और कई घंटों तक हवा में रहना पड़ता है इसलिए ज्यादा एंडयोरेंस की जरूरत होती है। अगर कोई दिक्कत आ जाए तो हेलिकॉप्टर को इस तरह टेकऑफ कराना होता है कि वह पानी में बैठ जाए, इसलिए नेवी के हेलिकॉप्टर का बॉटम नाव की तरह होना चाहिए। नेवी के हेलिकॉप्टर वॉरशिप में रहते हैं। वॉरशिप में जगह बहुत अहम होती है इसलिए नेवी को ऐसे हेलिकॉप्टर की जरूरत है जिसका ब्लेड और टेल फोल्ड हो सके। नेवी यूटिलिटी हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल रेस्क्यू मिशन से लेकर निगरानी रखने के लिए भी करती है। समुद्र में एक शिप से दूसरे शिप तक सामान और लोगों को पहुंचाने के लिए भी इसका इस्तेमाल होता है।



