
फतेहपुर।। जनपद की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी कुछ नया प्रयोग करना चाह रही है। ऐसे संकेत यहां से दो बार लोकसभा जाने वाली महामंडलेश्वर पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति को पिछड़ा आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद मिल रहे हैं। 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा द्वारा किए जा रहे इस प्रयोग का नतीजा भी देखने को मिल सकता है।
2022 के चुनाव में जिस तरह से भाजपा की सीटों में कमी आई थी उसमें फतेहपुर जनपद में भी भाजपा को दो सीटे गवानी पड़ी थी। लोकसभा चुनाव में फतेहपुर से हुई हार ने प्रदेश नेतृत्व को ही नहीं बल्कि केंद्रीय नेतृत्व को भी चौका दिया था। भाजपा नेतृत्व समझने में देरी नहीं की कि हार का कारण कोई और नहीं बल्कि आपसी गुटबाजी ही है। संगठन से लेकर जनप्रतिनिधियों के बीच जो गुटबाजी चुनाव में नजर आई उसे ही भापकर भाजपा आला कमान पहले प्रयोग में ही पूर्व केंद्रीय मंत्री को पिछड़ा आयोग का अध्यक्ष बनाकर न केवल भगवाधारी हिंदुत्व का चेहरा आगे किया है बल्कि अखिलेश यादव के पीडीए फार्मूले को मात देने की चाल भी चली है।
साध्वी के पिछड़ा आयोग का अध्यक्ष बनने के बाद राजनीतिक पंडितों की माने तो फतेहपुर की सभी छह विधानसभा सीटों में दो को छोड़ दिया जाए तो बाकी सीटों पर बदलाव देखा जा सकता है। यह भी कहना है कि वर्तमान विधायकों के क्षेत्रों में बदलाव भी संभव। कुछ नए व कुछ पुराने चेहरों को विधानसभा चुनाव में उतरा जा सकता है। ऐसी विधानसभाओ में विशेष निगाह है जहां बीजेपी हारी है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि बीजेपी अपने इस नए प्रयोग में यहां के लोगों चौका सकती है।
भाजपा नेताओं के बीच गुटबाजी की खाई अभी भी गहरी है। भाजपा नेतृत्व से सवाल पूछा जाना चाहिए कि क्या गुट बाजी की गहरी खाई साध्वी को पिछला आयोग का अध्यक्ष बनाने के बाद समाप्त हो पाएगी। जनपद की गुटबाजी समाप्त हो या फिर ना हो लेकिन इतना जरूर है कि पिछड़ा आयोग का अध्यक्ष बनने के बाद इसका लाभ भाजपा को विधानसभा चुनाव में जरूर हो सकता है।



