
फतेहपुर। मलवां थाना क्षेत्र एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। आदमपुर घाट के पास सामने आए कथित गौकशी प्रकरण ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। घटना को लगभग 13 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो कोई बड़ा खुलासा हुआ और न ही किसी जिम्मेदार पर ठोस कार्रवाई दिखाई दी। यही वजह है कि अब ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश क्यों की जा रही है।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अलीपुर मोड़ के पास एक संदिग्ध वाहन दुर्घटनाग्रस्त अवस्था में मिला था। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय चर्चाओं के मुताबिक वाहन में कथित रूप से गौवंश से संबंधित सामग्री होने की आशंका जताई गई। इसके बाद जो बातें सामने आईं, उन्होंने पूरे इलाके को हिला दिया। आरोप है कि घटना के बाद देर रात सूत्र छह बोरों में भरकर अवशेषों को आदमपुर घाट के नीचे ले जाया गया और जेसीबी मशीन से गड्ढा खुदवाकर उन्हें दबा दिया गया। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि मामला इतना गंभीर था तो मौके पर तत्काल फोरेंसिक जांच, वीडियोग्राफी और कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं कराई गई? दुर्घटनाग्रस्त वाहन आखिर कहां गया? उसे किसने हटवाया? वाहन का रिकॉर्ड क्या है? इन सवालों का जवाब अब तक प्रशासन और पुलिस की ओर से सार्वजनिक नहीं किया गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पूरे मामले की जानकारी स्थानीय पुलिस को थी, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय मामले को शांत कराने का प्रयास किया गया। लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। इलाके में यह भी चर्चा है कि अवैध गतिविधियों का नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है और बिना संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर ऐसी घटनाएं संभव नहीं हैं।
मीडिया टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर की गई पड़ताल में कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि रात के अंधेरे में जेसीबी चलने की आवाजें सुनी गई थीं। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद इलाके में असामान्य हलचल रही, लेकिन पुलिस की ओर से कोई सार्वजनिक कार्रवाई नहीं दिखाई दी। इससे लोगों में आक्रोश और संदेह दोनों बढ़ते जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार मामले में एक एसआई की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चर्चा यह है कि थाने स्तर पर पूरे घटनाक्रम की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई में गंभीरता नहीं दिखाई गई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुलिस की चुप्पी से संदेह और गहरा गया है।बताया जा रहा है कि मामले की जांच कर थाना प्रभारी को कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे, लेकिन अब तक न तो किसी गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई और न ही जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई। इससे लोगों के बीच यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि कहीं न कहीं पूरे प्रकरण को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो इससे कानून व्यवस्था पर जनता का विश्वास कमजोर होगा।


