
संवाददाता सचिन पाण्डेय
उन्नाव: गंगाघाट नगर पालिका में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट और अनियमितताओं का मामला अब तूल पकड़ चुका है। जिलाधिकारी गौरांग राठी के कड़े रुख के बाद बुधवार को जांच टीम जब मौके पर पहुंची, तो पालिका प्रशासन की कारगुजारियों की परतें उखड़ने लगीं। एसडीएम न्यायिक रामदेव निषाद और पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) सुबोध कुमार ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभालते हुए उन कार्यों की पोल खोली, जिन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे।
11 लाख की सड़क… और मानकों का ‘कत्ल’
जांच की आंच सबसे पहले थाने के गेट से लेकर सेल्फी प्वाइंट तक बनी उस इंटरलॉकिंग सड़क पर पहुंची, जिसे महज 110 मीटर की लंबाई के लिए 11.73 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से चमकाया गया था।
अधिकारियों ने जब तीन अलग-अलग स्थानों पर इस चमचमाती सड़क को खुदवाकर देखा, तो मानकों की धज्जियां उड़ती मिलीं। सड़क के नीचे प्रयुक्त सामग्री, उसकी मोटाई और बेस का काम कागजी दावों से कोसों दूर नजर आया। जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा किस तरह घटिया निर्माण की भेंट चढ़ाया गया, यह खोदे गए गड्ढों में साफ दिखाई दे रहा था।
आउटसोर्सिंग भर्ती और टेंडर में ‘अपनों’ पर मेहरबानी
गंगाघाट पालिका केवल घटिया निर्माण तक ही सीमित नहीं है। एसडीएम न्यायिक रामदेव निषाद ने स्वीकार किया कि टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता और आउटसोर्सिंग कर्मियों की भर्ती में धांधली की गंभीर शिकायतें मिली हैं। सूत्रों की मानें तो चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रखकर टेंडर बांटे गए। आउटसोर्सिंग भर्ती में भी पारदर्शिता का अभाव रहा, जिसकी जांच के लिए अब एक अलग विशेष टीम गठित करने की तैयारी है।
बदहाल शौचालय और दावों की पोल
टीम ने नगर पालिका क्षेत्र के सुलभ शौचालयों का भी औचक निरीक्षण किया। यहां सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति मिली। रखरखाव और संचालन की व्यवस्था इतनी जर्जर थी कि संबंधित कर्मचारियों के पास अधिकारियों के सवालों का कोई जवाब नहीं था। यह स्थिति दर्शाती है कि पालिका प्रशासन का जमीनी हकीकत से कोई वास्ता नहीं है और वे केवल कागजों पर ‘स्वच्छ भारत’ चला रहे हैं।



