जिला संवाददाता देवेंद्र तिवारी
उन्नाव।।जनपद के कटरी पीपरखेड़ा गांव से सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और सिस्टम की मिलीभगत का एक गंभीर मामला सामने आया है।
यह मामला सरकारी भूमि संख्या 2078, कुल रकबा 25 बीघा 10 बिस्वा से जुड़ा है, जिसमें से 9 बीघा 7 बिस्वा जमीन पर खुलेआम अवैध बाउंड्री वॉल और प्लॉटिंग कराई जा रही है।
शिकायत, आदेश और फिर सवाल…
पीड़िता द्वारा 4 अक्टूबर 2024 को जिलाधिकारी उन्नाव से लिखित शिकायत की गई थी।
शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने 7 अक्टूबर 2024 को एआरओ को जांच और कार्रवाई के निर्देश भी दिए।
इसके बाद 16 अक्टूबर 2024 को भेजी गई जांच रिपोर्ट में खुद यह स्वीकार किया गया कि
सरकारी जमीन पर अवैध बाउंड्री वॉल और निर्माण कार्य चल रहा है
भू-माफियाओं को नोटिस जारी कर 7 दिन में कब्जा हटाने के निर्देश दिए गए

लेकिन सवाल ये है कि—
जब सब कुछ साबित था, तो कार्रवाई क्यों नहीं?
नोटिस के बाद भी
अवैध निर्माण नहीं रुका
जमीन खाली नहीं कराई गई
उल्टा अब उसी जमीन पर दोबारा आर्टिफिशियल बाउंड्री वॉल खड़ी की जा रही है
और हैरानी की बात ये कि
अब एआरओ से फोन पर बात करने पर
सरकारी जमीन होने से ही इनकार किया जा रहा है
तो क्या— जिलाधिकारी को भेजी गई जांच रिपोर्ट फर्जी थी? 16 अक्टूबर 2024 की नोटिस सिर्फ कागज़ी कार्रवाई थी?
या फिर सर्वे ऑफिस उन्नाव में बैठे कुछ “सेटिंग-गेटिंग वाले पेशेवर कानूनगो” भू-माफियाओं को संरक्षण दे रहे हैं?
कानूनगो पर सीधे आरोप
सूत्रों के मुताबिक
पेशी कानूनगो देवेंद्र यादव लेखपाल की भूमिका इस पूरे मामले में संदिग्ध बताई जा रही है।
आरोप है कि पहले सरकारी नोटिस दिखाकर डराया जाता है
फिर अंदरखाने सौदेबाज़ी होती है
और अंत में भू-माफिया खुद को प्रशासन का “संरक्षित” बताने लगते हैं
अब सबसे बड़ा सवाल प्रशासन से
जब जमीन सरकारी है
कब्जा अवैध है
रिपोर्ट में सब स्वीकार है
तो फिर
10 महीने बाद भी कब्जा क्यों कायम है?
किसके इशारे पर कार्रवाई रोकी गई?
भू-माफियाओं को किस स्तर से संरक्षण मिल रहा है?
मांग साफ है
सर्वे ऑफिस उन्नाव में तैनात संदिग्ध कर्मचारियों पर तत्काल कार्रवाई
भूमि संख्या 2078 की आज ही पैमाइश
सरकारी रकबा 9 बीघा 7 बिस्वा को तत्काल कब्जा मुक्त कराया जाए अवैध निर्माण तुरंत ध्वस्त हो
अंत में
अगर सरकारी जमीन पर खुलेआम कब्जा होगा,
अगर नोटिस और रिपोर्ट सिर्फ दिखावा बन जाएंगी,
तो आम आदमी न्याय की उम्मीद आखिर करे तो किससे?
अब देखना ये होगा कि उन्नाव प्रशासन इस पूरे मामले पर सख़्त कार्रवाई करता है
या फिर ये फाइल भी सिस्टम की धूल में दबा दी जाएगी।



