
उन्नाव: शासन के आदेश पर रविवार को शुक्लागंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएससी) का औचक निरीक्षण किया गया, लेकिन इस निरीक्षण ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कन्नौज जनपद से आए आरसीएच एसीएमओ डॉ. बृजेश शुक्ला और डॉ. आतिफ असलम की दो सदस्यीय टीम ने इस जांच को अंजाम दिया। हालांकि, जांच के दौरान केंद्र के कर्मचारियों की सतर्कता और दस्तावेजों की सही स्थिति को देखकर ऐसा लगता है कि जांच को लेकर कोई सख्ती नहीं बरती गई।
जब जांच टीम ने पीएससी के ओपीडी रजिस्टर, दवाइयों की उपलब्धता, लैब की किट्स, और टीकाकरण की सामग्री की गहनता से जांच की, तो वो पूरी प्रक्रिया बिना किसी जोश के, बस एक औपचारिकता भर के रूप में दिखी। टीम ने कई व्यवस्थाओं में खामियां पाई, जिनमें प्रमुख तौर पर अभिलेखों का अद्यतन न होना और कुछ संसाधनों के रख-रखाव में लापरवाही शामिल थी। जबकि, टीम के सदस्य चाय और बिस्कुट में मग्न थे, इन खामियों को लेकर कोई स्पष्ट कदम उठाने की बजाय डॉ. राजेश चंद्र को सिर्फ निर्देश दिए गए।
यहां तक कि पीएससी में मौजूद उपकरणों और साफ-सफाई की व्यवस्था की जांच भी केवल देखी-देखी की गई, और कोई ठोस सुधारात्मक कार्रवाई करने की दिशा में कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया। टीम ने भले ही कमियों के बारे में चेतावनी दी हो, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि आखिर शासन के निर्देशों के बावजूद, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर इतनी लापरवाही क्यों बरती जा रही है।
डॉ. बृजेश शुक्ला ने स्वीकार किया कि पीएससी आम लोगों के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का पहला स्रोत होते हैं, लेकिन उनके निर्देशों के बावजूद, कार्यों में सुधार की कोई ठोस योजना सामने नहीं आई। डॉ. आतिफ असलम ने लैब और दवा वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने की बात की, लेकिन उनका ध्यान भी शायद कुछ और ही था।
निरीक्षण के बाद रिपोर्ट तैयार की जा रही है, और इस रिपोर्ट को शासन स्तर पर भेजा जाएगा, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन ने वाकई कोई ठोस कदम उठाने की योजना बनाई है, या फिर यह बस एक औपचारिकता का हिस्सा था, जैसा कि टीम की कार्यप्रणाली से नजर आता है।

