
लखनऊ।।राजधानी लखनऊ में कानून की रक्षा करने वाली खाकी एक बार फिर शर्मसार हुई है। PGI थाना क्षेत्र की वृंदावन पुलिस चौकी में तैनात एक उपनिरीक्षक (SI) को 13 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई न सिर्फ पुलिस महकमे के लिए झटका है, बल्कि समाज में फैले भ्रष्टाचार पर एक करारा प्रहार भी है।
कार्रवाई के बदले मांगी थी रिश्वत
जानकारी के अनुसार, आरोपी SI एक फरियादी से उसके मामले में कार्रवाई करने और राहत देने के नाम पर लगातार पैसे की मांग कर रहा था। बार-बार की मांग और मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर पीड़ित ने आखिरकार एंटी करप्शन संगठन से शिकायत दर्ज कराई।
जाल बिछाकर पकड़ा गया रिश्वतखोर
शिकायत की गोपनीय जांच के बाद एंटी करप्शन टीम ने पूरी योजना के तहत जाल बिछाया। जैसे ही आरोपी SI ने तय रकम ₹13,000 ली, टीम ने उसे दौड़ाकर दबोच लिया। मौके पर ही केमिकल टेस्ट कराया गया, जिसमें रिश्वत लेने की पुष्टि हो गई।
पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
SI की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। जिस वर्दी को जनता सुरक्षा और न्याय का प्रतीक मानती है, उसी वर्दी में बैठा अधिकारी अगर जनता से पैसे मांगे, तो यह पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।
कानूनी कार्रवाई शुरू
एंटी करप्शन टीम ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है। आगे की जांच जारी है और विभागीय कार्रवाई भी तय मानी जा रही है।
समाज के लिए बड़ा संदेश
यह कार्रवाई समाज के लिए एक स्पष्ट संदेश है—
रिश्वत देना भी अपराध है और रिश्वत लेना भी।
अगर कोई अधिकारी अवैध पैसे की मांग करता है, तो डरने की नहीं, शिकायत करने की जरूरत है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर कार्रवाई संभव है।
एंटी करप्शन अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि किसी भी सरकारी कर्मचारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने पर तुरंत शिकायत करें। आपकी पहचान गोपनीय रखी जाए
यह मामला बताता है कि भ्रष्टाचार चाहे छोटा हो या बड़ा, अब वह कानून की पकड़ से बाहर नहीं है। अगर आम नागरिक साहस दिखाए, तो सिस्टम को भी सही रास्ते पर लाया जा सकता है।



