
जिला संवाददाता देवेंद्र तिवारी
उन्नाव।
नवाबगंज विकास खंड के ग्राम सभा मलाव स्थित जूनियर हाई स्कूल में सरकारी योजनाओं की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। हालात ऐसे हैं कि यहां प्रधानाध्यापक और स्टाफ के सामने न शासन का डर है, न नियम-कानून का कोई असर।
मध्यान्ह भोजन योजना के तहत लंच के दौरान जब बच्चों से पूछा गया कि क्या उन्हें खाने में फल और दूध दिया जाता है, तो मासूम बच्चों ने अध्यापिका के सामने ही सच्चाई उजागर कर दी। बच्चों का साफ कहना था कि उन्हें न तो फल मिलता है और न ही दूध।
जब इस गंभीर मामले पर अध्यापिका से सवाल किया गया तो उनका कथित जवाब और भी हैरान करने वाला रहा। मैडम ने कहा— “चाहे योगी को बता दो या प्रधानमंत्री को, हमें कोई डर नहीं। हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।”
इस बयान ने सरकारी व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक ओर सरकार सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा और पोषण देने के लिए लाखों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ भ्रष्ट शिक्षक चंद पैसों की लालच में गरीब बच्चों के भोजन तक को डकार रहे हैं।
अब सवाल यह है कि
क्या शिक्षा विभाग और प्रशासन इस गंभीर मामले पर कार्रवाई करेगा?
या फिर मध्यान्ह भोजन योजना सिर्फ कागज़ों में ही चलती रहेगी और गरीब बच्चों की थाली यूं ही खाली रहेगी?
मलाव के इस स्कूल की सच्चाई सिस्टम की पोल खोलने के लिए काफी है।



