
फतेहपुर।बहुआ रोड से लेकर साथरियांव तक फैली नहर पर इतना बड़ा खेल हुआ है कि अगर इसकी परतें खुल जाएँ तो कई कुर्सियाँ हिल सकती हैं।सूत्रों का दावा है कि यह सिर्फ नहर सफाई घोटाला नहीं यह फतेहपुर की सिंचाई व्यवस्था के अंदर बैठे सिस्टम का पूरा एक्सपोज़ है जिसमेंअधिकारीठेकेदारऔर कुछ अंदरूनी लोगमिलकर करोड़ों का कागज़ी साम्राज्य’ चला रहे हैं।
सबसे बड़ा सवालवो कौन से अधिकारी हैं जिनकी नज़र में वर्क शुरू ही नहीं हुआ, मगर फाइलों में पूरा-
कागज़ों में करोड़ों की सफाई जमीनी हकीकतनहर बेहाल–
सफाई कागज़ में हुई है साहब, जमीन पर तो नहर रो रही है–
ग्रामीणों की आवाज़–
कौन है वह अधिकारी जो इनोवा से घूमते है, और सरकारी तेल को अपना पेट्रोल समझता है–
ग्रामीणों ने नाम नहीं बताया, लेकिन इशारा साफ किया-
सरकारी तेल का दुरुपयोग खुल्लम-खुल्ला–
यही अधिकारी 25,000 रुपये महीना लेकर निजी मकान मैनेज करता है।यह पैसा कहाँ से आता है क्यों दिया जाता है क्या यह भी सिस्टम का हिस्सा हैयही सवाल बड़े खुलासे की ओर इशारा करता है।
वरिष्ठ अधिकारियों की नज़र बंद क्यों–
फाइलों में काम 100%-
अगर ट्रॉली रजिस्टर, मास्टर रोल, भुगतान फाइल और लेवल-बुक की जांच हो जाए तो पूरा कांड फट पड़ेगा–
ग्रामीण मांग कर रहे हैं-
इन दस्तावेज़ों में ही सच और झूठ के बीच की सबसे बड़ी लड़ाई छिपी है।यह सिर्फ नहर सफाई नहीं यह पूरा सिस्टम घोटाला हैअगर जांच सही तरीके से हुई अधिकारी सस्पेंड होंगेठेकेदारों की मिलीभगत उजागर होगीविभागीय ऑडिट में फर्जीवाड़ा पकड़ेगा बजट का बंदरबाँट सामने आएगा–
और फतेहपुर का ये मामला उत्तर प्रदेश का एक बड़ा सिंचाई घोटाला साबित हो सकता है–
किसानों की आवाज़–
हम सिर्फ पानी नहीं चाहते हम न्याय चाहते हैं सरकारी धन की लूट जारी रहेगीनहरें बरसों बेहाल रहेंगीऔर भ्रष्टाचारियों की जेबें भरती रहेंगीयहाँ बह रहा है सरकारी धन—
फतेहपुर की बहुआ रोड से सिंचाई खंड साथरियांव तक बनी नहर में करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार का भयानक खेल सामने आया है, जो सिर्फ नहर सफाई तक सीमित नहीं बल्कि पूरी सिंचाई व्यवस्था के अंदर गहरे प्रणालीगत घोटाले का खुलासा करता है। सूत्र बताते हैं कि अधिकारी, ठेकेदार और अंदरूनी लोग मिलकर सरकार के बड़े बजट को फाइलों में तो सही दिखा देते हैं, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं होता।ग्रामीणों के द्वारा उठाए गए प्रमुख सवालों में यह शामिल है कि कौन से अधिकारी हैं जो इस घोटाले को अनदेखा करते हुए नहर सफाई के नाम पर फाइलों में करोड़ों का भुगतान करवा देते हैं जबकि जमीन पर नहर बेहाल है। वे अधिकारी जो सरकारी वाहन इनोवा से घूमते हैं और सरकारी तेल को निजी उपयोग में लगाते हैं, वे भी इस पूरी मिलीभगत का हिस्सा माने जा रहे हैं। एक गंभीर आरोप यह भी है कि ऐसे अधिकारियों को यह संदिग्ध धन प्रवाह घोटाले की तह तक जाने की दिशा में इशारा करता है।स्थानीय लोगों और किसानों की मांग है कि ट्रॉली रजिस्टर, मास्टर रोल, भुगतान फाइलें और लेवल-बुक सहित सभी संबंधित दस्तावेजों की पूर्ण जांच की जाए। उनका मानना है कि इन दस्तावेजों की पारदर्शी जांच ही इस पूरे घोटाले की परतें खोल सकती है। यदि सही जांच हुई तो कई अधिकारियों को निलंबित किया जाएगा, ठेकेदारों की मिलीभगत उजागर होगी, विभागीय ऑडिट में फर्जीवाड़ा पकड़ा जाएगा और बजट का बारह-बिसा वितरण सामने आ जाएगा।किसान स्पष्ट कर रहे हैं कि वे केवल पानी की मांग नहीं करते बल्कि न्याय की भी मांग करते हैं। उनका कहना है कि सरकारी धन की लूट जारी रही तो नहरें बरसों तक बेहाल रहेंगी और भ्रष्ट अधिकारियों की जेबें भरी जाती रहेंगी। वे दर्शाते हैं कि नहर सफाई कभी समय से नहीं होती, और जब होती भी है तो वह दिखावटी होती है, जैसे जेसीबी मशीन के माध्यम से थोड़ी बहुत खुदाई कर देना।यह मामला न केवल फतेहपुर का, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश का एक बड़ा सिंचाई घोटाला बनने की ओर बढ़ रहा है। जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों से जरूरी है कि वे इस मामले की गहनता से जांच करें और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें ताकि सरकारी धन की सुरक्षा हो और किसान वर्ग को न्याय मिल सके।क्या प्रशासन इस गंभीर आरोप पर कार्रवाई करेगा या यह मामला भी दबा दिया जाएगा
वही जिम्मेदार अधिकारी बोले रोहित सिंह ने बताया कि हमें जानकारी नहीं है फिर उन्होंने बताया हां जानकारी है मुझे काम चल रहा है वही जानकारी के अनुसार 20 तारीख तक पानी नहर में छोड़ा जाएगा–



