
फतेहपुर । बहुआ ब्लॉक के लक्ष्मणपुर ग्राम पंचायत में बन रहे नाले निर्माण कार्य में भारी गड़बड़ियों का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों और सूत्रों की माने तो नाले में घटिया ईंटें (दो और तीन नंबर) लगाई जा रही हैं, जबकि मसाला भी मानक के विपरीत (सात से दस एक का मिश्रण) बनाया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार शिकायतें मिलने के बाद भी अपनी मनमानी से ही काम करा रहा है।कामगारों ने भी स्वीकार किया कि वे पिछले करीब दस दिनों से काम कर रहे हैं और उन्हें जो सामग्री दी जाती है, वे उसी से नाला बना रहे हैं। उनका कहना है कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता तय करना उनका काम नहीं, इसलिए दोषारोपण उन पर नहीं होना चाहिए।
नाला तिरछा बन रहा, माप भी संदिग्ध जानकारी के मुताबिक नाले की तय लंबाई करीब 110 मीटर और चौड़ाई 1×1 मीटर है, लेकर स्थिति देखने वाले लोगों का कहना है कि नाला सीध में न बनकर जगह-जगह टेढ़ा-मेढ़ा बनाया जा रहा है। इससे निर्माण की गुणवत्ता और टिकाउपन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ब्लॉक में धांधली का “पुराना खेल”—सूत्रों के बड़े खुलासे
सूत्र बताते हैं कि बहुआ ब्लॉक में लंबे समय से विभिन्न योजनाओं में अनियमितताओं का बोलबाला है। ब्लॉक से लेकर जिले स्तर तक की मिलीभगत से कई कार्य सिर्फ कागजों में पूरे दिखा दिए जाते हैं, जबकि जमीन पर निर्माण नाम मात्र का होता है। कई योजनाओं में दिखावटी काम कराकर सरकारी धन की बंदरबांट किए जाने के गंभीर आरोप पहले भी उठते रहे हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि सीट अनुसूचित जाति की होने के चलते प्रमुख तो संतोष पासवान बने, लेकिन सूत्रों का दावा है कि उन्हें यह तक स्पष्ट जानकारी नहीं कि साढ़े चार साल में कितना बजट आया, कौन-कौन से कार्य स्वीकृत हुए और कितने पूरे हुए। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी गहरी है कि प्रमुख के नाम पर सिस्टम किसी और के इशारों पर चलता है।
ठेकेदार की ‘ताकत’ पर चर्चा, अधिकारी चुप
स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार ठेकेदार का इतना मजबूत नेटवर्क बन चुका है कि पूरा ब्लॉक स्टाफ उसके इशारों पर काम करता दिखाई देता है। सरकारी योजनाओं में आए बजट के उपयोग पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन किसी भी स्तर के अधिकारी द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।जवाबदेही पर बड़ा सवाल—ग्रामीण अब कार्रवाई की मांग पर अड़े
ग्रामवासियों ने मांग की है कि नाले निर्माण की तत्काल जांच कराई जाए और जो भी अधिकारी, कर्मचारी या ठेकेदार दोषी पाए जाएं, उन पर सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि सरकारी धन का दुरुपयोग किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



