
फतेहपुर। सदर तहसील के गांव मिश्रामऊ में बीती शाम चार थानों की पुलिस के साथ वन विभाग और राजस्व विभाग की टीम दोपहर बाद बिना किसी नोटिस के गांव पहुंची और गाटा संख्या 260 में बने बाबू सिंह के मकान के सामने बुलडोजर खड़ा कर दिया जिससे पूरे गांव में खौफ फैल गया। बाबू सिंह के परिजनों ने उच्च न्यायालय के आदेश की कॉपी दिखाई तो तहसीलदार अमरेश कुमार ने हाथ खड़े कर दिए और गेंद वन विभाग के पाले में डाल दी। और पूरी टीम वापस हो गई लेकिन देर शाम पूरी टीम फिर वापस आ गई और बुलडोजर से कार्यवाही शुरू कर दी 45 मिनट में मकान का तिहाई हिस्सा ध्वस्त हो गया जिससे पूरे मकान की नींव हिल गई। इस कार्यवाही से पूरे गांव में हड़कंप मच गया ।सूत्रों के अनुसार सत्तापक्ष के एक प्रभाव शाली व्यक्ति ने फोन कर हर हालत मकान को गिराने का फरमान जारी किया था अधिकारी बार बार अदालत की अवमानना की दुहाई देते रहे लेकिन सत्ता की हनक के आगे अधिकारी घुटने के बल आ गए उच्च न्यायालय की अधिवक्ता अर्चना सिंह ने बार बार अदालत के आदेश की अवमानना की बात अधिकारियों से करती रहीं लेकिन सब धरा का धरा रह गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिकायत कर्ता गोरेलाल पुत्र राम आसरे पाल का मकान गाटा संख्या 289 में वन विभाग की आरक्षित जमीन में बना है इस भूमि में लगभग 90 मकान बने हैं फिर कोई कार्यवाही न हुई। राजस्व विभाग के सूत्रों के अनुसार इस गांव में लगभग 150 बीघे जमीन वन विभाग की है लेकिन एक भी इंच जमीन विभाग मुक्त नहीं कर सका। अब सवाल उठता है कि क्या वन और राजस्व विभाग पूरे गांव की जमीन पर बुलडोजर कार्यवाही करके खाली कराएगा। पीड़ित बाबू सिंह का आरोप है वे अदालत जायेगें।



