उन्नाव। तुर्कमान नगर निवासी अधिवक्ता पीयूष सिंह लोधी के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा की गई मारपीट का मामला अब शहर में चर्चा का विषय बन चुका है। आरोप है कि पुलिस के दबाव में पीयूष का मेडिकल परीक्षण सही ढंग से नहीं किया गया, जिसके बाद अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर मामले की निष्पक्ष जांच और पीयूष का री-मेडिकल कराने की मांग की। जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद मेडिकल बोर्ड गठित कर पीयूष का दोबारा मेडिकल परीक्षण कराने का आदेश दिया गया।
घटनाक्रम
पड़ोसी उमेश लोधी से लंबे समय से विवाद झेल रहे अधिवक्ता पीयूष सिंह लोधी और उमेश के बीच सोमवार रात फिर से झगड़ा हुआ। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत किया। हालांकि, उमेश का कहना है कि पुलिस के जाने के बाद पीयूष ने गाली-गलौज की, जिसके बाद उसने पुलिस को फिर से सूचित किया। पुलिसकर्मी शोभित और धर्मेंद्र मौके पर पहुंचे, लेकिन जब मामला बढ़ा तो उन्होंने पीयूष को पीट दिया। इसके बाद पीयूष के भाई और परिजनों ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया और पथराव किया।
दही थाना एसओ अवनीश सिंह अपने फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और पीयूष को थाने ले आए। आरोप है कि अवनीश सिंह ने थाने में पीयूष के साथ मारपीट की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। मंगलवार को पुलिस ने पीयूष को जिला अस्पताल भेजा, जहां उनका मेडिकल परीक्षण किया गया। हालांकि, पीयूष और उनके समर्थकों का आरोप है कि पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट में अंदरूनी चोटों का जिक्र नहीं किया और दबाव डालकर गलत रिपोर्ट बनाई।
अधिवक्ताओं का विरोध
इस मामले की जानकारी मिलते ही अधिवक्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी से पीयूष लोधी का री-मेडिकल कराने की मांग की। जिलाधिकारी ने इस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया। बोर्ड के गठन के बाद गुरुवार को पीयूष का फिर से मेडिकल परीक्षण किया जाएगा।
मेडिकल रिपोर्ट में क्या सामने आया?
जिला अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, पीयूष के शरीर पर कई चोटें पाई गई हैं। रिपोर्ट में उनकी पीठ पर चोट, दाहिनी भुजा पर कंधे से कोहनी तक 53 सेंटीमीटर की चोट और दाहिने पैर के घुटने से 10 सेंटीमीटर नीचे 1.50.5 सेंटीमीटर के आकार में छिलने का उल्लेख है। हालांकि, अधिवक्ताओं का कहना है कि पीयूष को गंभीर चोटें आई हैं, जिन्हें रिपोर्ट में सही तरीके से दर्ज नहीं किया गया है।
सहयोग का वादा
घायल अधिवक्ता को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है, जहां बुधवार को सपा नगर अध्यक्ष ओमेंद्र लोधी और रमन पटेल ने उनका कुशलक्षेम पूछा। नगर अध्यक्ष ने पीयूष को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया और पुलिसकर्मियों की बर्बरता के खिलाफ आवाज उठाने का वादा किया।
यह मामला पुलिस द्वारा की गई बर्बरता और दबाव के कारण न्याय मिलने में हो रही देरी को लेकर शहर में एक नया मोड़ लेकर आया है। अधिवक्ता संगठन और नागरिक समाज इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।
अधिवक्ता संगठनों की मांग
अधिवक्ता संगठनों का कहना है कि पुलिसकर्मियों का व्यवहार पूरी तरह से असंवैधानिक और अमानवीय था, और इसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। उनका कहना है कि अगर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे।
इस मामले में आगे क्या होता है, यह समय बताएगा, लेकिन फिलहाल शहर में इस घटना को लेकर गहरी नाराजगी और तनाव का माहौल है।


