जिला संवाददाता देवेंद्र तिवारी
उन्नाव। 45 साल पुराना एक काला अध्याय आखिरकार न्याय की रोशनी में समाहित हुआ, जब बीघापुर के सातन गांव में 1980 में हुई दो दोस्तों की हत्या के मामले में बुधवार को अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह हत्याकांड तब हुआ था जब दो दोस्त—चाचा प्रयाग नारायण शुक्ल और हरीशंकर—को न्यायालय पेशी पर जाते समय गोलियों से भून दिया गया था।
किसी फिल्मी साजिश से कम नहीं था यह मामला, जिसमें आरोपितों ने पूर्व की रंजिश के चलते चाचा-पोते को घात लगाकर निशाना बनाया। अदालत ने अंततः मामले में दोषी ठहराए गए फूल सिंह को उम्रभर की सजा सुनाई, जबकि अन्य आरोपितों की मृत्यु हो चुकी है। इसके अलावा, 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
मूलत: 6 नवंबर 1980 को बलदेव प्रसाद और उनके चाचा प्रयाग नारायण शुक्ल सहित अन्य लोग बीघापुर में न्यायालय की पेशी पर जा रहे थे, जब रास्ते में घात लगाए आरोपितों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। हमले में चाचा प्रयाग नारायण और हरीशंकर की जान चली गई। इस घातक हमले के बाद मामले में कई आरोपितों को सजा भी हुई, लेकिन कुछ ने उच्च न्यायालय में स्टे ले लिया, जिससे मामला और लंबा खिंचता गया।
अब, इतने वर्षों बाद इस हत्याकांड में दोषी ठहराए गए फूल सिंह को मिली सजा ने पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीदें फिर से जिंदा कर दी हैं। अदालत के फैसले के बाद स्वजन की आंखों में आंसू थे, क्योंकि 45 साल बाद उन्हें यह न्याय मिल सका, जिसके वे हकदार थे।


