
मैहर के सरला नगर में स्वास्थ्य विभाग की ‘दरियादिली’ का अनोखा मामला सामने आया है। यहां M S मंडल नाम का अयोग्य डॉक्टर खुलेआम ऐसा ‘दवाखाना’ चला रहा है, जैसे दिल्ली, भोपाल, जबलपुर, सतना और मैहर के MBBS डॉक्टर अपनी क्लीनिक चलाते हैं।
अधिकारियों की ‘अनदेखी’ या ‘संरक्षण’?
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस फर्जी डॉक्टर की गतिविधियों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को पहले से है, लेकिन शायद विभाग किसी ‘बड़ी घटना’ का इंतजार कर रहा है। सवाल उठता है कि अगर यह क्लिनिक BMO और CHMO की देखरेख में चल रहा है, तो जनता को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी जाती? और अगर यह अवैध है, तो कार्रवाई में इतनी देरी क्यों?
फर्जी डॉक्टर, असली खतरा!*
इस ‘झोलाछाप’ डॉक्टर की वजह से न जाने कितने मरीज गलत ईलाज का शिकार हो सकते हैं, लेकिन स्वास्थ्य अमले को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। क्या प्रशासन को किसी गंभीर हादसे के बाद ही जागना है, या फिर पहले ही इस पर कार्रवाई होगी?
जनता के सवाल, प्रशासन की चुप्पी!
अब देखना यह होगा कि BMO और CHMO इस मामले में कोई ठोस कदम उठाते हैं या फिर यह फर्जी क्लिनिक यूं ही चलता रहेगा, और लोग गलत इलाज के शिकार होते रहेंगे। सवाल तो यही है—क्या सरकारी विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ शिकायतें सुनने तक सीमित रह गई है, या फिर जनता की सेहत भी किसी प्राथमिकता में आती है?



