
पूरे शहर को पता है कातिल कौन, मगर सरकारी पर्चे पर लिखा है अज्ञात!
लखनऊ संवाददाता इरफ़ान कुरैशी
थाना दुबग्गा क्षेत्र में हुए एक दर्दनाक हादसे ने पुलिसिया सिस्टम के उस चेहरे को एक बार फिर बेनकाब कर दिया है, जिसे देखकर कानून के रखवालों पर से भरोसा उठ जाए। मामला सीधे एक दरोगा जी, सब-इंस्पेक्टर अशोक कुमार और उनकी धर्मपत्नी से जुड़ा है, इसलिए खाकी का रवैया एकदम वीआईपी मोड में आ गया है। आइए, आपको तफ्सील से बताते हैं कि कैसे एक तरफ एक लाचार पिता का इकलौता चिराग बुझ गया, और दूसरी तरफ पुलिस लिखा-पढ़ी के खेल में मास्टर डिग्री हासिल कर रही है।
तथ्यों और आरोपों के मुताबिक, हरदोई थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर अशोक कुमार अपनी बेगम साहिबा को गाड़ी चलाना सिखा रहे थे। कार Creta-UP 12 CE 6277 की रफ्तार इतनी कातिलाना थी कि दिनांक 29.05.2026 को दोपहर करीब 2:30 से 4:00 बजे के बीच, अमेठिया सलेमपुर, अंधे की चौकी, हरदोई रोड के पास आ रही एक मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी।
इस हादसे ने मोहम्मद साहिल उम्र लगभग 23 वर्ष की मौके पर ही जान ले ली। साहिल अपने पीछे चार बहनें और एक बीमार पिता जो कैंसर से पीड़ित हैं छोड़ गया। वह घर का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। मोटरसाइकिल पर पीछे बैठे उनके दोस्त मो.महताब अली भी गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
हादसा होते ही दरोगा जी का कानूनी दिमाग दौड़ पड़ा। मामले को रफा-दफा करने और यह दिखाने के लिए कि एक्सीडेंट मोटरसाइकिल से नहीं बल्कि पेड़ से टकराने से हुआ, गाड़ी को ले जाकर पेड़ से लड़ा दिया गया। वाह दरोगा जी, इसे कहते हैं ऑन-स्पॉट एविडेंस मैनेजमेंट!
लेकिन वहां मौजूद जनता मूर्ख नहीं थी। राहगीरों और स्थानीय लोगों ने तुरंत गाड़ी के चालक महिला और दरोगा जी को मौके पर ही पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। और दोनों का वीडियो भी बना दिया जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है। लोगों को उम्मीद थी कि न्याय होगा। लेकिन ट्विस्ट तो अब शुरू होता है! स्थानीय लोगों और पीड़ित पक्ष का आरोप है कि थाने में अपराधियों को AC वाले कमरे में बैठाकर वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है, जबकि इंसाफ की गुहार लगाने आए पीड़ित पक्ष को थाने से भगाया जा रहा है।
अब बात करते हैं उस सबसे बड़े मजाक की, जिसे पुलिस F.I.R. कहती है। जनता चिल्ला-चिल्ला कर कह रही है कि गाड़ी चलाने वाली महिला और बगल में बैठे दरोगा जी कौन हैं। प्रार्थना-पत्र में भी स्पष्ट लिखा है कि गाड़ी एक महिला चालक चला रही थी। लेकिन धन्य हो हमारी दुबग्गा पुलिस!
यदि आप सरकारी रिपोर्ट को देखें, तो उसमें साफ-साफ लिखा है कि वाहन नंबर UP 12 CE 6277 का चालक अज्ञात है। उसके रिश्तेदार का नाम भी अज्ञात दर्ज है और पता भी अज्ञात, अज्ञात लिखा गया है।
पूरे शहर को पता है कि गाड़ी किसकी है और कौन चला रहा था, लेकिन हमारी जांबाज पुलिस के लिए सब अज्ञात है। अब इस अज्ञात महाशय या महिला पर क्या कार्रवाई होगी, इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं। क्या कमाल की दूरदर्शिता है! नामजद मुकदमा लिखने में दुबग्गा पुलिस के हाथ कांप रहे हैं, क्योंकि मामला भाई-बिरादरी, खाकी का जो ठहरा।
प्रार्थना पत्र और एफआईआर के मुताबिक मृतक मोहम्मद साहिल अमेठिया सलेमपुर, थाना दुबग्गा, लखनऊ का निवासी था। इस हादसे में उनके साथी मो. माज पुत्र महताब अली गंभीर रूप से घायल हुए। मामले की शिकायत प्रार्थी अज्जे खान पुत्र इरशाद खान द्वारा की गई है। दुर्घटना कार नंबर UP 12 CE 6277 से कारित की गई।
पीड़ित परिवार पर अब कथित तौर पर समझौते और पैसों का दबाव बनाया जा रहा है। मुआवजा भी उतना, जितने में एक गरीब की जिंदगी का सौदा हो सके।
सवाल यह उठता है कि क्या इस देश में दो तरह के कानून हैं? एक कानून आम जनता और गरीबों के लिए, जिन्हें इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं। और दूसरा कानून खाकी वर्दी वाले अमीरों और रसूखदारों के लिए, जो सड़क पर किसी की जान भी ले लें, तो उन्हें थाने में AC की हवा और अज्ञात होने का सुरक्षा कवच मिलता है? बड़े अधिकारी आश्वासन दे रहे हैं कि निष्पक्ष कार्रवाई होगी, लेकिन जब नींव ही अज्ञात के झूठ पर रखी हो, तो इंसाफ की इमारत कैसी होगी, यह दुबग्गा की जनता बखूबी समझ रही है।

