
फतेहपुर।जनपद में इन दिनों ललौली थाना क्षेत्रअवैधओवरलोडिंग, मोरम परिवहन और कथित वसूली के खेल को लेकर चर्चा का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों और सूत्रों की मानें तो पुलिस अधीक्षक की सख्त कार्यशैली और हाल ही में हुए थाना प्रभारियों के फेरबदल के बावजूद क्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर कोई प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा। बल्कि हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि रात ढलते ही पूरा थाना क्षेत्र ओवरलोड मोरम वाहनों का “ कॉरिडोर ” बन जाता है।सूत्रों के अनुसार, बांदा की तरफ से आने वाली ओवरलोड मोरम भरी गाड़ियां जिंदपुर टोल प्लाजा से बचने के लिए रात के अंधेरे में बंधवा मार्ग का इस्तेमाल कर सीधे जोनिहा, सहिली, जयराम नगर और बिंदकी की ओर निकल जाती हैं। सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जब यह भारी वाहन थाना क्षेत्र और मुख्य मार्गों से होकर गुजरते हैं तो आखिर जिम्मेदार विभागों की नजर इन पर क्यों नहीं पड़ती।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में तैनात थाना प्रभारी के समय अवैध गतिविधियों पर काफी हद तक रोक लगी थी, लेकिन अब हालात उलट दिखाई दे रहे हैं। चर्चा यह भी है कि कुछ पुराने जमे कर्मचारियों और कथित लोकेटर सिस्टम के जरिए ओवरलोड वाहनों से अवैध वसूली का नेटवर्क सक्रिय है। यही कारण है कि रात में सड़कों पर खुलेआम मोरम से लदे ट्रैक्टर-ट्राला और डंपर फर्राटा भरते नजर आते हैं।सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि जिंदपुर टोल प्लाजा से गुजरने के बजाय अधिकतर गाड़ियां वैकल्पिक ग्रामीण मार्गों से निकाली जा रही हैं, जिससे सरकार के राजस्व को भारी क्षति पहुंच रही है। टोल सूत्रों के अनुसार केवल कुछ वाहन ही दतौली मार्ग से होकर टोल पार करते हैं, जबकि बड़ी संख्या में गाड़ियां रात के समय बंधवा मार्ग से डायवर्ट कर दी जाती हैं। अगर यह सिलसिला लगातार जारी रहा तो सरकार को करोड़ों के राजस्व नुकसान से इंकार नहीं किया जा सकता।उधर खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बीच-बीच में दिखावे के लिए चेकिंग अभियान चलाकर कुछ गाड़ियों को पकड़ लिया जाता है, लेकिन बाद में सेटिंग और सांठगांठ के जरिए मामला शांत कर दिया जाता है। इससे अवैध खनन और ओवरलोडिंग पर लगाम लगाने की बजाय सिस्टम पर सवाल और गहरे होते जा रहे हैं।क्षेत्र में चर्चा यह भी है कि पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी की सख्ती का असर अन्य क्षेत्रों में तो दिखाई देता है, लेकिन ललौली थाना क्षेत्र में कथित “सिस्टम” इतना मजबूत हो चुका है कि कार्रवाई की बजाय सब कुछ पुराने ढर्रे पर चलता नजर आता है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से लेकर राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले नेटवर्क पर कार्रवाई करेगा, या फिर ओवरलोड मोरम और कथित वसूली का यह खेल यूं ही चलता रहेगा,यदि प्रशासन वास्तव में सख्त कार्रवाई करता है और सभी मोरम वाहनों को जिंदपुर टोल प्लाजा से अनिवार्य रूप से गुजरने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है, तो न केवल अवैध ओवरलोडिंग पर लगाम लगेगी बल्कि सरकार के राजस्व में भी भारी बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल क्षेत्र में यही चर्चा है कि “रात के अंधेरे में चल रहा यह खेल आखिर कब तक चलता रहेगा?”



