
फतेहपुर। खागा मंडी में बिना “सुविधा शुल्क” दिए कोई भी काम समय पर नहीं होता और जानबूझकर फाइलों को लंबित रखा जाता है।स्थानीय किसानों और व्यापारियों का कहना है कि मंडी में कार्यरत कुछ बाबू और गार्ड मिलकर एक संगठित तरीके से पैसे की वसूली कर रहे हैं। उनका आरोप है कि चेक जारी करने जैसी सामान्य प्रक्रिया को भी जटिल बनाकर उससे मोटी रकम वसूली जाती है।
सूत्रों के अनुसार, एक साल तक का “चार्ज एकमुश्त लिया जाता है, जो छोटे किसानों और सीमित पूंजी वाले व्यापारियों के लिए बेहद भारी पड़ता है।किसानों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति पैसे देने से मना करता है, तो उसकी फाइल को जानबूझकर रोक दिया जाता है या उसमें तकनीकी कमियां निकालकर उसे बार-बार दौड़ाया जाता है। इससे न केवल उनका समय बर्बाद होता है, बल्कि आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। छोटे किसान, जो पहले से ही लागत और बाजार की अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं, इस व्यवस्था से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

वहीं, मंडी सचिव ने इन आरोपों से अनभिज्ञता जताते हुए कहा है कि उन्हें इस तरह की किसी भी शिकायत की जानकारी नहीं है। हालांकि, स्थानीय लोगों का दावा है कि यह मामला कोई नया नहीं बल्कि लंबे समय से चला आ रहा है, लेकिन अब जाकर लोगों ने खुलकर आवाज उठानी शुरू की है।इस पूरे प्रकरण ने मंडी की पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों और व्यापारियों का कहना है लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि मंडी में व्याप्त भ्रष्टाचार पर रोक लग सके और आम किसानों व व्यापारियों को राहत मिल सके