
लखनऊ, 31 मार्च 2026
प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने सोमवार को विधानसभा स्थित सभागार में उर्वरक कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक कर प्रदेश में उर्वरक आपूर्ति एवं वितरण व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उर्वरकों की कम आपूर्ति, डायवर्जन तथा कंपनियों द्वारा निर्धारित प्रतिबद्धताओं को पूरा न करने के मुद्दों पर गंभीर चर्चा की गई।
बैठक में कृषि मंत्री ने अधिकारियों के साथ उर्वरक कंपनियों के प्रदर्शन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप समय पर पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि कुछ कंपनियों द्वारा आवंटन के बावजूद अपेक्षित मात्रा में उर्वरक की आपूर्ति न करना गंभीर लापरवाही है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने उर्वरक आपूर्ति की मॉनिटरिंग ठीक से न करने पर जिम्मेदार अधिकारी को भी फटकार लगाई।
कृषि मंत्री ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि जिन कंपनियों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं है, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसमें ब्लैकलिस्टिंग, वित्तीय दंड तथा अन्य दंडात्मक प्रावधानों को लागू करने पर भी विचार किया जाएगा। उन्होंने कंपनियों को चेतावनी दी कि यदि भविष्य में भी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं किया गया तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उर्वरकों की सुचारु उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि भविष्य की रणनीति इस प्रकार तैयार की जाए जिससे आपूर्ति व्यवस्था में किसी प्रकार की बाधा न आए और किसानों को समय पर पर्याप्त उर्वरक मिल सके।
प्रमुख सचिव रवींद्र द्वारा उर्वरक आपूर्ति एवं वितरण की प्रभावी निगरानी के लिए एक सुदृढ़ प्रणाली विकसित करने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कंपनियों को अपनी आपूर्ति श्रृंखला से संबंधित सभी विवरण स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने होंगे तथा किसी भी प्रकार के विचलन पर तत्काल स्पष्टीकरण देना होगा।
इस अवसर पर कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी, अपर निदेशक आशुतोष मिश्रा, संयुक्त निदेशक अजय कृष्णा तथा उर्वरक कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।


