
फतेहपुर। जनपद के लाल सोने की वैध पट्टे की आड़ में अवैध मोरम खनन और परिवहन का काला कारोबार अब केवल चोरी-छिपे नहीं, बल्कि प्रशासन के इकबाल को खुली चुनौती बनकर उभर रहा है। मर्का (बांदा) घाट के खंड संख्या-3 से संचालित हो रहा यह लाल सोने का खेल रात के अंधेरे में माफिया की तिजोरियां भर रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे संगठित तंत्र पर चुप्पी साधे बैठे हैं। मर्का, असोथर और थरियाव जैसे प्रमुख थाना क्षेत्रों के ठीक सामने से दिनरात बिना नंबर प्लेट वाले ओवरलोड ट्रक, डंपर और ट्रैक्टरों का बेखौफ गुजरना कई गंभीर सवाल खडे करता है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क लोकेटरों की मदद से एक सुनियोजित सिंडिकेट के रूप में काम कर रहा है, जहाँ एनजीटी के सख्त नियमों की खुलेआम धज्जियां उडाई जा रही हैं। सबसे बडा सवाल प्रशासन की कार्यशैली पर उठता है। यदि स्थानीय पुलिस और जिम्मेदार अधिकारी इस व्यापक स्तर पर हो रहे अवैध परिवहन से अनजान हैं, तो यह उनके सूचना तंत्र की एक गंभीर विफलता है। वहीं, यदि सब कुछ जानकारी में होने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं की जा रही, तो संदेह गहरा जाता है कि आखिर इस अवैध कारोबार को किसका अभयदान प्राप्त है!? आखिर माफिया को कानून का डर क्यों नहीं सता रहा!? सडकों पर दौडते बिना नंबर प्लेट वाले और ढके हुए वाहन किसी बडी अनहोनी की ओर इशारा करते हैं। कानून की धज्जियां उडाते इन वाहनों के कारण दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ रहा है। बडा सवाल यह है कि यदि ये अनियंत्रित वाहन किसी निर्दोष को कुचलकर भाग जाएं, तो बिना नंबर के इनकी पहचान कैसे सुनिश्चित होगी? क्या प्रशासन किसी बडे हादसे का इंतजार कर रहा है? इस संगठित लूट का सीधा असर सरकारी खजाने पर पड रहा है।
ओवरलोडिंग और अवैध परिवहन के जरिए सरकार को हर दिन करोडों रुपये के राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। इसके साथ ही, भारी वाहनों के दबाव से करोडों की लागत से बनी सडकें और यमुना पुल जर्जर हो रहे हैं, जिसका खामियाजा अंततः आम जनता को भुगतना पड रहा है। यमुना पुल अब अवैध कारोबार का मुख्य कॉरिडोर बन चुका है, जहाँ धूल और जाम से जनता बेहाल है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इन माफियाओं के सिंडिकेट को तोडने का साहस दिखाता है या फिर लाल सोने की यह अवैध गंगा इसी तरह अनवरत बहती रहेगी। जनता अब जवाब और ठोस कार्रवाई चाहती है।



