
बांदा।।अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक क्षण की दूसरी वर्षगांठ पर गुरुवार को बांदा जनपद पूरी तरह राममय नजर आया। शहर के कोने-कोने में ‘जय श्री राम’ के जयघोष गूंजते रहे। स्थानीय श्रद्धालुओं ने इस पावन अवसर को एक बड़े उत्सव के रूप में मनाया, जिसमें सुंदरकांड पाठ से लेकर भव्य शोभायात्रा और दीपोत्सव जैसे कार्यक्रमों ने चार चांद लगा दिए।
हनुमान मंदिर में सुंदरकांड और 2100 दीपों का महा-दीपोत्सव
उत्सव का विधि-विधान से शुभारंभ पद्माकर चौराहा स्थित सुप्रसिद्ध हनुमान मंदिर में हुआ। यहाँ सुबह से ही भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था। विद्वान ब्राह्मणों और रामभक्तों ने सामूहिक रूप से सुंदरकांड का पाठ किया, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
शाम ढलते ही पूरा मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र 2100 दीपों की रोशनी से जगमगा उठा। दीपों की इस कतार ने दीपावली जैसा अहसास कराया। श्रद्धालुओं ने बताया कि यह दीपोत्सव उस ऐतिहासिक पल की याद में मनाया गया है, जिसने करोड़ों हिंदुओं के सदियों पुराने सपने को साकार किया था। इसके उपरांत भक्तों के लिए एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
झांकियों ने मोहा मन: शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी शोभायात्रा
दिन का सबसे मुख्य आकर्षण शहर के किरण कॉलेज चौराहे से निकाली गई भव्य शोभायात्रा रही। इस यात्रा की भव्यता देखते ही बन रही थी। शोभायात्रा में सबसे आगे सुसज्जित रथ पर ‘राम दरबार’ की मनमोहक झांकी विराजमान थी, जिसे देख हर कोई नतमस्तक हो उठा। इसके साथ ही ‘भारत माता’ की आकर्षक झांकी ने लोगों में देशभक्ति और धर्म के प्रति जोश भर दिया।
रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधान पहने श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों की थाप पर झूमते हुए चल रहे थे। महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में इस उत्सव का हिस्सा बने। शोभायात्रा के मार्ग में जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया।
इन मार्गों पर दिखा उत्सव का उल्लास
किरण कॉलेज चौराहे से शुरू होकर यह शोभायात्रा शहर के व्यस्ततम इलाकों से गुजरी, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:
डिग्गी चौराहा और बाकरगंज
पद्माकर चौराहा और रेलवे स्टेशन
बाबूलाल चौराहा और मुख्य चौक बाजार
महर्षि देवी बनखंडी नाका
यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन भी मुस्तैद रहा। हर प्रमुख चौराहे पर भक्तों की सेवा के लिए स्थानीय लोगों ने स्टॉल लगाकर पानी और शरबत की व्यवस्था की थी। यात्रा वापस अपने शुरुआती बिंदु किरण कॉलेज चौराहा पहुंचकर संपन्न हुई।
श्रद्धा और भक्ति का संगम: विशाल भंडारे के साथ समापन
शोभायात्रा के समापन पर एक और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। देर रात तक चले इस भंडारे में शहरवासियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आयोजन समिति के सदस्यों ने कहा कि रामलला की स्थापना केवल एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक है। हर वर्ष इस गौरवशाली दिन को इसी तरह उत्साह के साथ मनाया जाएगा।
बांदा में हुआ यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि अयोध्या से शुरू हुई राम नाम की लहर आज हर घर और हर दिल तक पहुंच चुकी है। उत्सव के अंत तक भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ और पूरे शहर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार बना रहा।



