
फतेहपुर।। जिले के थरियांव थाना क्षेत्र से एक ऐसी वारदात सामने आई है,जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।ग्राम लतीफपुर स्थित जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य केंद्र में डिलीवरी के दौरान नवजात की मौत हो गई।आरोप है कि प्रसव के वक्त एएनएम ने पैसों की मांग की,और जब पैसा नहीं मिला तो लापरवाही बरती गई।
सरकारी योजनाओं के पोस्टर दीवारों पर टंगे रहे,लेकिन अंदर इंसानियत दम तोड़ती रही। सवाल साफ है—क्या गरीब की जान की कीमत तय कर दी गई है?
फतेहपुर जनपद के थरियांव थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम लतीफपुर स्थित स्वास्थ्य केंद्र (जच्चा-बच्चा केंद्र) से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है।दिनांक 03 जनवरी 2026 को डिलीवरी के दौरान एक नवजात की मौत हो गई।परिजनों का आरोप है कि प्रसव के समय तैनात एएनएम (नर्सिंग स्टाफ) द्वारा खुलेआम पैसों की मांग की गई।
भड़का आक्रोश,स्वास्थ्य केंद्र बना रणक्षेत्र
इस दर्दनाक घटना के तीन दिन बाद,आज 6 जनवरी 2026 को गुस्साए ग्रामीण सड़क पर उतर आए।भाजपा युवा मोर्चा जिला कार्य समिति सदस्य शिवम नंदवंशी के नेतृत्व में करीब दो दर्जन ग्रामीणों ने स्वास्थ्य केंद्र में जमकर हंगामा किया।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई पहली घटना नहीं—यहाँ हर डिलीवरी पर पैसे की वसूली होती है।जो नहीं देता,उसे भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है।
इस घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने आज 06 जनवरी 2026 को स्वास्थ्य केंद्र का घेराव कर जमकर हंगामा किया।इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व शिवम नंदवंशी,भारतीय जनता पार्टी जिला कार्य समिति सदस्य (युवा मोर्चा) ने किया।उनके साथ करीब दो दर्जन ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे।
“स्वास्थ्य सेवा या वसूली केंद्र?”
ग्रामीणों का आरोप है कि लतीफपुर का यह जच्चा-बच्चा केंद्र सेवा नहीं,वसूली का अड्डा बन चुका है।सरकारी योजनाओं के तहत निःशुल्क होने वाली सुविधाओं के बावजूद डिलीवरी के समय रकम मांगी जाती है,और न देने पर लापरवाही बरती जाती है।यही लापरवाही,परिजनों के मुताबिक,नवजात की मौत का कारण बनी।
शिवम नंदवंशी का तीखा हमला
प्रदर्शन के दौरान शिवम नंदवंशी ने कहा कि
“सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को बदनाम करने का काम कुछ जिम्मेदार लोग कर रहे हैं।गरीबों के हक पर डाका डालकर सरकार की छवि धूमिल की जा रही है।अगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई,तो आंदोलन और तेज़ होगा।”
यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं,पूरे सिस्टम का आईना है।अगर आप या आपके आसपास कहीं भी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में पैसों की मांग,लापरवाही या भ्रष्टाचार देखा जाए—तो चुप मत रहिए।आवाज़ उठाइए,
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
हंगामे के दौरान स्वास्थ्य केंद्र पर मौजूद स्टाफ संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।ग्रामीणों ने उच्च स्तरीय जांच,दोषी एएनएम पर कठोर कार्रवाई,और पीड़ित परिवार को न्याय व मुआवजा देने की मांग की है।अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं—कार्रवाई होगी या फाइलें धूल खाएँगी?
फतेहपुर की यह वारदात सिर्फ़ एक नवजात की मौत की कहानी नहीं है,यह उस सिस्टम की कहानी है जहाँ सेवा से पहले वसूली होती है,अब देखना यह है कि प्रशासन दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा।
पूछता है—क्या गरीब की जान की कोई कीमत नहीं?



