
कानपुर। नए साल (New Year 2026) के जश्न की आड़ में कानपुर को नशे के दलदल में धकेलने की एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश का आरपीएफ (RPF) ने पर्दाफाश किया है। कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नेपाल से तस्करी कर लाई गई चरस की भारी खेप बरामद की है। इस काले धंधे में शामिल एक विदेशी नागरिक और एक महिला तस्कर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है।
तस्करों की योजना इस खेप को न्यू ईयर की हाई-प्रोफाइल पार्टियों और युवाओं के बीच खपाने की थी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि अगर यह नशे की खेप बाजार में पहुँच जाती, तो कानपुर की सड़कों पर ‘उड़ता पंजाब’ जैसा मंजर देखने को मिल सकता था।
RPF की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: प्लेटफॉर्म पर बिछाया जाल
कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रही आरपीएफ टीम को खुफिया जानकारी मिली थी कि ट्रेन के जरिए नशे की एक बड़ी खेप शहर में प्रवेश करने वाली है। सघन चेकिंग के दौरान आरपीएफ के जवानों ने प्लेटफॉर्म पर एक विदेशी नागरिक और उसके साथ मौजूद महिला की संदिग्ध हरकतों को नोट किया।
जैसे ही दोनों ने स्टेशन से बाहर निकलने की कोशिश की, घेराबंदी कर उन्हें रोक लिया गया। तलाशी लेने पर उनके पास मौजूद बैगों से करोड़ों रुपये की इंटरनेशनल मार्केट वैल्यू वाली उच्च गुणवत्ता वाली चरस बरामद हुई। विदेशी तस्कर की गिरफ्तारी ने इस मामले के तार अंतरराष्ट्रीय ड्रग माफियाओं से जोड़ दिए हैं।
नेपाल से कानपुर तक ‘ट्रैवल’ कर रही थी मौत
प्रारंभिक पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पकड़ा गया विदेशी तस्कर और उसकी महिला सहयोगी इस खेप को नेपाल बॉर्डर से लेकर आए थे। नेपाल के पहाड़ी इलाकों से चरस की यह वैरायटी तैयार की गई थी, जिसकी मांग महानगरों की पार्टियों में सबसे ज्यादा होती है।
तस्करों ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए ट्रेन के सफर को चुना था। पकड़े गए आरोपियों के पास से नेपाल के दस्तावेज और विदेशी मुद्रा भी बरामद होने की सूचना है। आरपीएफ अब यह पता लगा रही है कि कानपुर में यह माल किस ‘हैंडलर’ को सौंपा जाना था।
न्यू ईयर पार्टियों पर ‘ड्रग माफिया’ की नजर
31 दिसंबर की रात को होने वाली पार्टियों के लिए नशा तस्कर पहले से ही सक्रिय हो गए हैं। कानपुर के नामी होटलों, पब और निजी फार्महाउस में होने वाले जश्न में सप्लाई के लिए यह खेप मंगवाई गई थी। गिरफ्तार महिला तस्कर का काम संभवतः ‘कूरियर’ के रूप में माल को सुरक्षित ठिकाने तक पहुँचाना था, ताकि किसी को शक न हो।
इंटरनेशनल मार्केट में करोड़ों की कीमत
बरामद चरस की मात्रा और उसकी शुद्धता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को भी इस मामले की जानकारी दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से भारत-नेपाल सीमा का फायदा उठाकर यूपी के बड़े शहरों में नशे की सप्लाई कर रहा था।
सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप: कौन है स्थानीय मददगार?
विदेशी तस्कर की गिरफ्तारी के बाद आईबी (IB) और स्थानीय खुफिया तंत्र भी सक्रिय हो गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि कानपुर में वो कौन से ‘सफेदपोश’ लोग हैं जो इस विदेशी तस्कर के संपर्क में थे? पुलिस उन मोबाइल नंबर्स की जांच कर रही है जिनसे तस्कर लगातार संपर्क में थे। स्टेशन के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को भी खंगाला जा रहा है ताकि पता चल सके कि स्टेशन के बाहर कोई उन्हें लेने तो नहीं आने वाला था।
कमिश्नरेट पुलिस का ‘अलर्ट’ मोड
इस घटना के बाद कानपुर पुलिस कमिश्नरेट ने पूरे शहर में होटल, लॉज और पबों की चेकिंग तेज कर दी है। पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि न्यू ईयर के जश्न में किसी भी प्रकार की नशीली सामग्री का इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संदिग्ध इलाकों और हुक्का बारों पर भी छापेमारी की तैयारी है।
निष्कर्ष: आरपीएफ की इस मुस्तैदी ने निश्चित रूप से कानपुर के युवाओं को एक बड़े खतरे से बचा लिया है। नेपाल से कानपुर तक फैला यह ‘नशा जाल’ बताता है कि तस्करों की जड़ें कितनी गहरी हैं। विदेशी नागरिक की संलिप्तता ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब देखना यह है कि क्या पुलिस इस पूरे नेटवर्क के असली ‘किंगपिन’ तक पहुँच पाती है या नहीं



