
कानपुर। औद्योगिक नगरी कानपुर के गोविंद नगर इलाके में एक बड़ी मोबाइल शॉप से 60 लाख रुपये के स्मार्टफोन पार करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का कानपुर पुलिस कमिश्नर ने पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में नेपाल और बिहार के शातिर चोरों समेत कुल 5 आरोपियों को दबोचा है। लेकिन इस बड़ी कामयाबी के बीच एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि चोरों ने चोरी किए गए लगभग सभी मोबाइल नेपाल के बाजारों में बेच दिए हैं।
यह घटना दर्शाती है कि अपराधियों के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमाएं केवल कागजी हैं और वे कानून की आंखों में धूल झोंककर करोड़ों का माल पार करने में माहिर हो चुके हैं।
अंतरराज्यीय नहीं, ‘अंतरराष्ट्रीय’ था चोरी का मास्टरप्लान
पुलिस कमिश्नर के अनुसार, इस गिरोह ने बेहद शातिराना तरीके से गोविंद नगर की नामी मोबाइल शॉप को निशाना बनाया था। पकड़े गए आरोपियों में बिहार और नेपाल के शातिर अपराधी शामिल हैं, जो पहले रेकी करते थे और फिर शटर काटकर कुछ ही मिनटों में करोड़ों का माल साफ कर देते थे।
नेपाल कनेक्शन: चोरी करने के बाद आरोपी सीधा बिहार के रास्ते नेपाल भाग जाते थे, जहाँ चोरी के मोबाइल को खपाना आसान होता था क्योंकि वहां भारतीय पुलिस की पहुंच सीमित है।
गिरफ्तारी: सर्विलांस और मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने जाल बिछाया और इस गैंग के 5 सदस्यों को धर दबोचा।
सरकार और पुलिस से चुभते सवाल: जब फोन बिक गए, तो रिकवरी कैसे?
पुलिस ने अपराधियों को तो पकड़ लिया, लेकिन व्यापारी के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि उसका 60 लाख का नुकसान कैसे पूरा होगा? न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से हम प्रशासन से ये सवाल पूछते हैं:
सीमाओं पर सुरक्षा की पोल: अपराधी 60 लाख का माल लेकर कानपुर से बिहार और फिर नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर गए, लेकिन कहीं भी चेकिंग में क्यों नहीं फंसे? क्या ‘स्मार्ट सिटी’ के कैमरे केवल चालान काटने के लिए हैं?
रिकवरी का सच: पुलिस ने खुलासा किया कि फोन बेच दिए गए हैं। ऐसे में दुकानदार को उसका माल या पैसा वापस दिलाने की क्या योजना है? क्या केवल आरोपियों को जेल भेजना ही इंसाफ है?
गश्त पर सवाल: गोविंद नगर जैसे घनी आबादी और व्यापारिक क्षेत्र में इतनी बड़ी चोरी हो गई और पुलिस की नाइट पेट्रोलिंग को भनक तक नहीं लगी। क्या रात में पुलिस केवल मुख्य चौराहों तक सीमित रहती है?
व्यापारियों में डर: “अगला नंबर किसका?”
इस खुलासे के बाद व्यापारियों में संतोष से ज्यादा डर है। व्यापारियों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय गैंग कानपुर को अपना सॉफ्ट टारगेट बना रहे हैं, तो उनकी सुरक्षा राम भरोसे है। कानपुर उद्योग जगत ने मांग की है कि प्रमुख बाजारों में हाई-टेक नाइट विजन कैमरे और पुलिस पिकेट की संख्या बढ़ाई जाए।
पुलिस कमिश्नर का दावा— “जल्द होगा बाकी नेटवर्क का खात्मा”
कानपुर पुलिस कमिश्नर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके हैंडलर के बारे में अहम सुराग मिले हैं। पुलिस की टीमें बिहार और नेपाल बॉर्डर पर सक्रिय हैं ताकि चोरी के माल की बरामदगी की जा सके और इस नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।
निष्कर्ष: दिखावे की मुस्तैदी या ठोस सुरक्षा?
60 लाख की चोरी का खुलासा करना पुलिस के लिए सराहनीय है, लेकिन असली सफलता तब मानी जाएगी जब व्यापारियों का माल सुरक्षित रहे और अपराधी वारदात करने से पहले सौ बार सोचें। सरकार को चाहिए कि वह उत्तर प्रदेश और बिहार-नेपाल बॉर्डर के बीच सुरक्षा तालमेल को और मजबूत करे ताकि अपराधी राज्य की सीमा पार न कर सकें।



