-आर के श्रीवास्तव:प्रमुख संवाददाता
जस्टिस सूर्यकांत भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) बने हैं। उनका जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले के पेटवाड़ गाँव में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त की और बाद में रोहतक के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी की। वे 1984 में वकालत के क्षेत्र में आए और हरियाणा के सबसे युवा महाधिवक्ता बनने का गौरव हासिल किया। 2004 में वे पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने, और बाद में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी नियुक्त हुए। 2019 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए।जस्टिस सूर्यकांत ने संवैधानिक मानवाधिकार, प्रशासनिक सुधार, भूमि अधिग्रहण, आरक्षण नीति, और सार्वजनिक संसाधनों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मामलों में कई ऐतिहासिक फैसले दिए हैं। वे आर्टिकल 370 हटाने के फैसले में शामिल प्रमुख न्यायाधीश रहे हैं। उन्होंने न्याय प्रणाली में सुधार और न्याय तक आसान पहुंच को प्राथमिकता दी है।उनका कार्यकाल 24 नवंबर 2025 से शुरू होकर लगभग 15 महीने तक चलेगा और वे 9 फरवरी 2027 को 65 वर्ष की आयु पूरी कर सेवानिवृत्त होंगे। इस दौरान उनसे कई अहम और संवेदनशील मामलों में न्यायिक फैसलों की उम्मीद की जा रही है। उनके कार्यशैली को शांत, स्पष्ट और निष्पक्ष माना जाता है जो न्याय के साथ संवेदनशीलता को भी महत्व देते हैं।जस्टिस सूर्यकांत का जीवन संघर्ष से प्रेरणा प्राप्त कर प्रेरक और प्रभावशाली न्यायाधीश का परिचय देता है, जो भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के सर्वोच्च पद पर आसीन होकर देश के न्यायिक इतिहास में अपना योगदान देंगे।


