
संवाददाता सचिन पाण्डेय
उन्नाव।। जनपद के सोहरामऊ थाना क्षेत्र में पुलिस ने अवैध खनन की सूचना पर एक ट्रैक्टर पकड़ा। ट्रैक्टर खाली मिला और कागज़ात भी नहीं मिले — लेकिन इस पकड़ ने पुलिस और लेखपाल दोनों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल — 12 दिनों से चल रहा मिट्टी का धंधा पुलिस को दिखाई क्यों नहीं दिया?
आशा खेड़ा और आसपास के गांवों में लगातार 12 दिनों से मिट्टी डाली जा रही है, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही लोग रोज़ देख रहे हैं, लेकिन:
पुलिस पेट्रोलिंग को कुछ नहीं दिखा
लेखपाल पूरी तरह अनजान बने रहे
अवैध खनन की सैकड़ों ट्रिप निकल गईं, एक भी कार्रवाई नहीं हुई
और अब एक खाली ट्रैक्टर पकड़कर “सूचना पर कार्रवाई” का दावा किया जा रहा है
लेखपाल पर गंभीर आरोप — “प्राइवेट परमिशन” का गलत इस्तेमाल?
ग्रामीणों के मुताबिक, जब उन्हें अवैध खनन पर शक हुआ और लेखपाल को जानकारी दी गई, तो लेखपाल ने “प्राइवेट परमिशन” होने का बहाना बनाया।
लेकिन हकीकत यह है कि:
प्राइवेट परमिशन में सिर्फ किसान के अपने खेत/घर में मिट्टी डालने की छूट होती है
पर यहां कमर्शियल रेट पर मिट्टी बेची जा रही है
मिट्टी गांव से बाहर भी भेजी जा रही है
लेखपाल न केवल अनजान बने रहे बल्कि खनन माफियाओं को ढाल देने जैसा रवैया दिखा रहे हैं
पुलिस की भूमिका संदिग्ध — 12 दिन चुप, सूचना पर खाली ट्रैक्टर पकड़ा
ग्रामीणों का तगड़ा आरोप है कि:
पुलिस की पेट्रोलिंग सिर्फ कागज़ों में दिख रही है
रातभर चलते ट्रैक्टर-ट्रॉली पुलिस की नजर से कैसे बच गए?
क्या पुलिस भी इस अवैध मिट्टी कारोबार को अनदेखा कर रही थी?
आज पकड़ा गया ट्रैक्टर खाली था — इससे यह भी सवाल उठता है कि क्या असली ट्रिप निकलने के बाद सिर्फ दिखावे की कार्रवाई की गई?
निचोड़: अवैध खनन माफिया नहीं, असली सवाल प्रशासन की चुप्पी का है
लेखपाल की “अनभिज्ञता”
पुलिस की “पेट्रोलिंग”
और 12 दिनों तक बिना रोकटोक चल रहा अवैध कारोबार
यह संकेत देता है कि मामला सिर्फ माफियाओं का नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही या मिलीभगत का भी हो सकता है।



